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Archive for December 5th, 2017

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत 6 श्रवण बाधित बच्चों को श्रवण उपकरण प्रदाय

Posted by mp samachar On December - 5 - 2017Comments Off on राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत 6 श्रवण बाधित बच्चों को श्रवण उपकरण प्रदाय

download (1)आगर-मालवा स्थ्य विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना के तहत कलेक्टर श्री अजय गुप्ता ने श्रवण बाधित 6 बच्चे अर्पिता पिता मेहरबान निवासी शिवखेड़ी, कुलदीप पिता जगदीश निवासी चकवाड़ा, धीरज पिता लालसिंह निवासी करकड़िया, रानु पिता राजू मेवाड़ा निवासी किलोदा सुसनेर, पिता अनिल निवासी पचलाना, जीविका पिता विजय निवासी सोयत को श्रवण उपकरण (हियरिंग हेड) प्रदान किये। जिसका 6 माह उपयोग करने के पश्चात् इन बच्चों को अरविन्दों मेडिकल कॉलेज इन्दौर में सर्जरी हेतु भेजा जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. एस बारिया, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविन्द विश्नार, भारतीय रेडक्रास सोसाइटी आगर के नोडल अधिकारी डॉ. शशांक सक्सेना, आर बी एस के नोडल अधिकारी डॉ. जे सी परमार, जिला मलेरिया अधिकारी आर सी ईरवार, एवं आर बी एस के जिला समन्वयक मांगुसिंह पंवार आदि उपस्थित रहे।

PAK ने लिखा सुषमा को खत, बोला- बंद करो सीजफायर का ‘उल्लंघन’

Posted by mp samachar On December - 5 - 2017Comments Off on PAK ने लिखा सुषमा को खत, बोला- बंद करो सीजफायर का ‘उल्लंघन’

pak-wrote-letter-to-sushmaनई दिल्लीः पाकिस्तान कभी भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा और न ही कभी अपनी गलतियों को मानेगा। बार-बार सीजफायर का उल्लंघन करने वाले पाकिस्तान ने उलटा भारत पर ही इल्जाम लगाया है कि भारत की ओर से इसकी शुरुआत होती है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपनी भारतीय समकक्ष सुषमा स्वराज को खत लिखा। उन्होंने अपने खत में भारत पर आरोप लगाया कि आपकी तरफ से एलओसी और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सीजफायर उल्लंघन होता है, इसे बंद किया जाए। सुषमा को यह खत पिछले महीने नवंबर में मिला।

आसिफ ने पत्र में लिखा, अब समय आ चुका है दोनों देश सीजफायर का उल्लंघन बंद करें क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान जा रही है। आसिफ ने आरोपलगाया कि भारतीय जवान फायरिंग कर पहले ‘उकसाते’ हैं जिसका पाकिस्तानी फौज केवल जवाब देती है। पाकिस्तान का दावा है कि इस साल भारत के जवानों ने कथित तौर पर 1,300 बार सीजफायर का उल्लंघन किया है जिसमें उसके 52 नागरिकों की मौत हुई है।

स्वीकार्य नहीं पाकिस्तान का आरोप
सुषमा ने अभी इस खत का कोई जवाब नहीं दिया है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान का यह आरोप स्वीकार्य नहीं है। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि साल 2017 में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन के मामलों में बढ़ौतरी हुई है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अक्तूबर तक पाकिस्तान ने इंटरनैशनल बॉर्डर और एलओसी पर 724 बार सीजफायर का उल्लंघन किया है,जबकि पिछले पूरे साल में यह संख्या केवल 449 थी।

पाकिस्तान की फायरिंग में 12 नागरिकों और 17 भारतीय जवानों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। वहीं खत पर भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इससे दोनों देशों के संबंधों के बीच अब कोई सुधार नहीं होगा क्योंकि मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की रिहाई से उनके बीच और दूरी आ गई है। इसका ताजा उदाहरण रूस के सोची में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में देखने को मिला, जहां सुषमा स्वराज और पाक पीएम शाहिद अब्बासी दोनों ने शिरकत की थी लेकिन दोनों ही ओर से औपचारिक मुलाकात की भी कोई पहल नहीं की गई।

कोटला से किनारा करेगा BCCI? कई बार मुश्किल में पड़ा है दिल्ली में मैच

Posted by mp samachar On December - 5 - 2017Comments Off on कोटला से किनारा करेगा BCCI? कई बार मुश्किल में पड़ा है दिल्ली में मैच

555_1512467120_618x347भारत और श्रीलंका के बीच दिल्ली में खेला जा रहा टेस्ट मैच अब तक खेल से ज्यादा प्रदूषण की वजह से सुर्खियों रहा है. यह मामला उस समय बढ़ गया जब श्रीलंकाई टीम के खिलाड़ियों ने दिल्ली के खराब मौसम में तबीयत बिगड़ने के बाद इसकी शिकायत की थी. इसके बाद खुद श्रीलंकाई बोर्ड ने भी बीसीसीआई से जवाब मांगा था कि उन्होंने इस टेस्ट मैच के लिए दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम को वेन्यू के तौर पर क्यों चुना है.

दिल्ली में मैचों के आयोजन पर होगा विचार

इस शर्मनाक स्थिति के पैदा होने के बाद बीसीसीआई के सचिव अमिताभ चौधरी ने सोमवार को कहा कि भविष्य में दिल्ली में इस मौसम में मैचों के आयोजन पर विचार किया जाएगा, क्योंकि इस सीजन में राजधानी में स्मॉग की काफी समस्या रहती है. बीसीसीआई इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है.

बीसीसीआई सचिव चौधरी ने कहा कि जब श्रीलंका के भारत दौरे का कार्यक्रम तय हुआ था तब उन्होंने भी इस पर आपत्ति नहीं जताई थी. अगर उन्हें कार्यक्रम को लेकर कोई आपत्ति थी तो उन्होंने हमें उससे अवगत नहीं कराया.

आपको बता दें कि दिल्ली टेस्ट मैच के दूसरे दिन के दूसरे सत्र में भारत जब पांच विकेट खोकर 509 रनों पर था तभी श्रीलंकाई गेंदबाज लाहिरू गमागे को परेशानी हुई और खेला रोका गया. इसी बीच श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने खराब वातावरण की शिकायत मैदानी अंपायरों से की. जिसके कारण तकरीबन 15 मिनट का खेल रुका. जिसके बाद काफी बवाल हुआ था, श्रीलंकाई टीम के रवैये से परेशान होकर भारत ने अपनी पारी घोषित कर दी थी.

पहले भी दिल्ली में बाधित हुए हैं मैच

बीसीसीआई अगर भविष्य में दिल्ली में कोई इंटरनेशनल मैच नहीं कराने का फैसला लेती है तो यह DDCA और दिल्ली में क्रिकेट फैंस के लिए बहुत बड़ा झटका होगा. खैर यह कोई पहला मौका नहीं है जब दिल्ली में खेला गया कोई मैच विवादों में रहा हो और जिसके कारण खेल रोका गया हो.

इससे पहले डीडीसीए को साल 2009 में भी तब शर्मशार होना पड़ा था जब फिरोजशाह कोटला मैदान में भारत और श्रीलंका के बीच एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सीरीज का आखिरी मैच खराब पिच के कारण रद्द करना पड़ा था.

जिस समय मैच समाप्त घोषित किया गया उस समय श्रीलंका का स्कोर पांच विकेट पर 83 रन था. पिच पर अनियमित उछाल से बल्लेबाजों को शुरू से ही परेशानी हो रही थी. एक भारतीय तेज गेंदबाज की गेंद तिलकरत्ने दिलशान की कोहनी पर भी लगी थी.

अलविदा शशि कपूर: तिरंगे में लिपटे रोमांटिक स्टार को दी गई अंतिम विदाई, रो पड़े सितारे

Posted by mp samachar On December - 5 - 2017Comments Off on अलविदा शशि कपूर: तिरंगे में लिपटे रोमांटिक स्टार को दी गई अंतिम विदाई, रो पड़े सितारे

kapoor_shashi_999_1512466864_618x347मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ सीनियर एक्टर शशि कपूर का दोपहर सांताक्रूज में अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस दौरान राजनीति और फिल्म जगत की कई हस्तियां मौजूद थीं. शशि कपूर 70 और 80 के दशक के मशहूर रोमांटिक स्टार थे. सोमवार शाम को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था. वो 79 वर्ष के थे.

शशि लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे. परिवार में दो बेटा और एक बेटी है. पत्नी जेनिफर का पहले ही निधन हो चुका है. शशि का एक बेटा सिद्धार्थ पृथ्वी थियेटर का काम संभालते हैं जबकि दूसरे बेटे कुणाल मशहूर फोटोग्राफर हैं. शशि की बेटी संजना थियेटर सिखाने का काम करती हैं.

शशि कपूर के अंतिम संस्कार में पहुंचे सैफ, छाता लेकर दिखे रणबीर

एम्बुलेंस से घर लाया गया पार्थिव शरीर

शशि कपूर के पार्थिव शरीर को मंगलवार सुबह 10.30 बजे एक एम्बुलेंस के जरिए उनके घर ‘जानकी कुटीर’ लाया गया. अंतिम दर्शन के लिए कुछ देर तक उनका शव पृथ्वी थियेटर में भी रखा गया था. शशि का पार्थिव तिरंगे में लपेटकर श्मशान गृह तक पहुंचा. इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. करीब 11.45 बजे शशि का पार्थिव शरीर सांताक्रूज के श्मशान गृह पहुंचा. उनके बेटे कुणाल-करण और बेटी संजना के साथ कपूर भतीजे रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और रणबीर कपूर समेत परिवार के लोग और रिश्तेदार मौजूद थे.

शशि कपूर का शव जब श्मशान पहुंचा वहां मौजूद मुंबई पुलिस ने पारंपरिक तरीके से पार्थिव शरीर से तिरंगे को अलग किया. इसके बाद पुलिस की एक टुकड़ी ने तीन राउंड फायरिंग कर आख़िरी सलामी दी. मौके पर मौजूद लोगों ने एक मिनट का मौन कर शशि को श्रद्धांजलि अर्पित की. अंतिम संस्कार के वक्त बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में शशि के प्रशंसक डटे थे.

क्या इस एक वजह से फिल्मों में नहीं चल पाए शशि कपूर के बेटे?

अंतिम विदाई देने आए ये सेलिब्रिटीज

शशि कपूर को अंतिम विदाई देने वालों में प्रमुख रूप से अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, श्याम बेनेगल, शाहरुख खान, सैफ अली खान, अयान मुखर्जी, हंसल मेहता, नंदिता दास, लारा दत्ता, महेश भट्ट, रामदास आठवले, जावेद अख्तर, सलीम खान, संजय दत्त, नसीरुद्दीन शाह, अनिल कपूर, आमिर खान, राकेश ओमप्रकाश मेहरा, पूनम ढिल्लो, शक्ति कपूर, देव मुखर्जी, सचिन पिलगांवकर, सीमा पहवा, सुप्रिया पाठक, सुरेश ओबेरॉय और कई दूसरे सितारे मौजूद रहे. सभी की आंखें नम थीं.

शशि कपूर की बेटी संजना और बेटा करण सोमवार रात को ही मुंबई पहुंच गए थे. शशि कपूर के निधन की खबर सुनकर ऋषि कपूर भी दिल्ली में चल रही अपनी फिल्म की शूटिंग कैंसिल कर मुंबई पहुंच गए. वह दिल्ली में फिल्म ‘राजमा चावल’ की शूटिंग कर रहे थे. अस्पताल में शशि कपूर को देखने रणधीर कपूर, रणबीर कपूर, कृष्णा राज कपूर और कपूर फैमिली के और भी मेंबर पहुंचे थे.

1984 में पत्नी जेनिफर की कैंसर से मौत के बाद शशि कपूर काफी अकेले रहने लगे थे और उनकी तबीयत भी बिगड़ती गई. बीमारी की वजह से शशि कपूर ने फिल्मों से दूरी बना ली. साल 2011 में शशि कपूर को भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था. 2015 में उन्हें दादा साहेब पुरस्कार भी मिल चुका था. कपूर खानदान के वो ऐसे तीसरे शख्स थे जिन्हें ये सम्मान हासिल हुआ था.

आकर्षक व्यक्तित्व वाले शशि कपूर के बचपन का नाम बलबीर राज कपूर था. बचपन से ही एक्टिंग के शौकीन शशि स्कूल में नाटकों में हिस्सा लेना चाहते थे. उनकी यह इच्छा वहां तो कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन उन्हें यह मौका अपने पिता के ‘पृथ्वी थियेटर्स’ में मिला.

मासूमों से रेप करने वाले पिशाच, फांसी पर लटका देना चाहिए: शिवराज

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201712041729240317_CM-Shivraj-on-bill-awarding-hanged-till-death_SECVPFभोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में सोमवार को दंड विधि (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस विधेयक में रेप के दोषियों को फांसी की सजा दिलाने का प्रावधान है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘बेटी जब तक पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी तब तक बोझ मानी जाएगी।’

इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सीएम ने कहा कि ‘बढ़ते महिला अपराध एक चुनौती हैं, बेटी जब तक पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी तब तक बोझ मानी जाएगी। बेटियों की रक्षा के लिए कानून के साथ दूसरे उपाय भी जरूरी हैं।’

शिवराज सिंह ने कहा कि ‘जिसमें मानवीयता नहीं वह मानव नहीं माने जा सकते हैं। रेप करने वाले पिशाच होते हैं। बलात्कारियों को फांसी के फंदे पर लटका देना चाहिए।’ सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि ‘विधेयक को अनुमति मिले इसके लिए राष्ट्रपति से प्रयास करेंगे।’ उन्होंने कहा कि ‘मासूमों के साथ रेप करने वाले जीने लायक नहीं हैं।’

विधेयक में महिलाओं का पीछा करने को भी अपराध माना गया है। उन्होंने कहा कि ‘मौत के डर से अपराधी अपराध करने से बचेंगे।’ शिवराज सिंह ने खुले आसमान के नीचे भटकने वाली बच्चियों की सुरक्षा के इंतज़ाम की भी बात कही।

गीता के संस्थान में छात्राओं से छेड़छाड़, मुस्कुराते हुए बोले भार्गव- ‘जांच होगी’

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201712051236557975_Case-file-in-Tukoganj-police-station_SECVPFभोपाल। इंदौर में जिस मूक बधिर संस्थान में गीता रह रही है, उसी संस्थान के टीचर के खिलाफ बालिकाओं से छेड़छाड़ के आरोप लगने के मामले में राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव ने मुस्कुराते हुए कहा कि ये गंभीर विषय है। उन्होंने अधिकारियों से बात कर जांच रिपोर्ट मंगाई है।

इंदौर के सुदामानगर स्थित मूक बधिर संस्थान के टीचर गोपाल खेड़े पर दो मूक बधिर बालिकाओं ने छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं। गोपाल खेड़े उसी संस्थान के टीचर हैं, जिसमें पाकिस्तान से आयी गीता रहती है। हालांकि इस मामले में तुकोगंज थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है। कुछ दिनों पहले तुकोगंज थाना में मूक बधिर संगठन के सेमीनार में ये मामला सामने आया था।

गीता के माता-पिता की तलाश में जुटे संगठन
इस मामले में ये भी आरोप लग रहे है कि पाकिस्तान से आयी गीता के नाम दो मूक बधिर संगठनों की खींचतान के कारण ये हालात बने हैं। बताया जा रहा है कि गीता को आश्रय देने वाले संगठन और गीता के माता-पिता की तलाश में जुटे संगठन में खींचतान के कारण ये सब स्थितियां निर्मित हुई हैं।

‘मामले को राज्य सराकर ने गंभीरता से लिया’
संस्थान का कहना है कि ‘टीचर पर छेड़छाड़ के आरोप झूठे हैं और इससे मध्यप्रदेश और भारत की छवि खराब हो रही है। शिक्षक गोपाल खेड़े पर पर छेड़छाड़ का आरोप साजिश के तहत संस्था की छवि बिगाड़ने के लिए लगाया गया है। क्योंकि लोग गीता को संस्थान से हटवाना चाहते है।’ वहीं इस मामले को राज्य सराकर ने गंभीरता से लिया है।

‘बच्चों से की जाएगी पूछताछ’
सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव का कहना है कि ‘वो जो संस्था है, जहां गीता को रखा गया है। उस संस्था के बारे में शिकायत आ रही है, तो ये गंभीर मसला है। क्योंकि विदेश मंत्री के आग्रह और निर्देश पर गीता को वहां रखा गया है। यदि वो संस्था या उसके कर्मचारी ऐसा आचरण करते है। तो ये दुखद है, हम एनजीओ का परीक्षण कराएंगे। वहां के अधिकारियों के निर्देश दिए जाएंगे कि बच्चों से जाकर पूछताछ करें, यदि शिकायत सच पायी जाती है, तो एनजीओ के खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।’

गुजरात में बीजेपी से छिन सकती है सत्ता, कांग्रेस से कांटे का मुकाबला: सर्वे

Posted by mp samachar On December - 5 - 2017Comments Off on गुजरात में बीजेपी से छिन सकती है सत्ता, कांग्रेस से कांटे का मुकाबला: सर्वे

BJP-may-lose-from-in-power-in-Gujarat-Kante-ki-Mukabla-survey-news-in-hindi-220001नई दिल्ली. गुजरात में 9 दिसंबर और 14 दिसंबर को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं. राज्य में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी और कांग्रेस में कांटे की टक्कर चल रही है. ऐसा हम इसलिए कह रहे है क्योंकि चुनाव से ठीक पांच दिन पहले एक हिन्दी न्यूज चैनल के सर्वे में यह बात निकल कर सामने आ रही है कि 22 साल से गुजरात में राज कर रही बीजेपी को कांग्रेस पटेलों की मदद से कड़ी टक्कर दे रही है.

ओपिनियम पोल के मुताबिक विधानसभा चुनाव में बीजेपी एक बार फिर सत्ता में लौट सकती है और उसे 95 सीटें मिल सकती है जबकि कांग्रेस 82 सीटों पर कब्जा जमा सकती है. ऐसे में अगर सीटों का ये अंतर और घटा तो ओपिनियम पोल के मुताबिक कांग्रेस भी गुजरात में वापसी कर सकती है.

कांग्रेस-बीजेपी को मिलेंगे बराबर वोट: सर्वे

बात अगर दोनों पार्टियों के वोट शेयर की करें तो ओपनियम पोल के मुताबिक बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 43-43 फीसदी वोट मिल सकते हैं जबकि 14 फीसदी वोट अन्य के खाते में जा सकता है.

सौराष्ट्र कच्छ के शहरी इलाके में बीजेपी तो ग्रामीण इलाके में कांग्रेस लोगों की पहली पसंद

बात अगर गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ के शहरी क्षेत्रों की करें तो ओपनियन पोल के मुताबिक यहां बीजेपी कांग्रेस को काफी पीछे छोड़ रही है. बीजेपी को यहां 46 फीसदी वोट मिलने की संभावना दिख रही है जबकि कांग्रेस को 16 फीसदी कम सिर्फ 30 फीसदी वोट मिलता दिख रहा है.गुजरात के सौराष्ट्र कच्छ क्षेत्र में विधानसभा की 54 सीटें हैं. ऐसे में ओपिनियन पोल के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस ने बीजेपी पर बढ़त बना ली है. ग्रामीण इलाकों में बीजेपी को जहां सिर्फ 43 फीसदी वोट मिलता दिख रहा है वहीं कांग्रेस को 49 फीसदी वोट मिलने की संभावना है. वहीं बात अगर शहरी इलाकों की करे तो यहां बीजेपी कांग्रेस से आगे निकलती दिख रही है. सर्वे के मुताबिक सौराष्ट्र-कच्छ के शहरी इलाकों में बीजेपी को 45 तो कांग्रेस को 39 फीसदी वोट शेयर मिलता दिख रहा है.

उत्तर गुजरात में कांग्रेस को बीजेपी से ज्यादा मिलेंगे वोट: सर्वे

अगर उत्तर गुजरात की बात करें तो ओपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी को यहां करारा झटका लगा है. इस इलाके में कांग्रेस ने बीजेपी पर 4 फीसदी वोटों की बढ़त बनाकर रखी है. उत्तर गुजरात में कांग्रेस को 49 फीसदी वोट मिलने की संभावना है जबकि बीजेपी को यहां सिर्फ 45 फीसदी वोट ही मिल सकते हैं.

दक्षिण गुजरात में शहरी इलाके में कांग्रेस तो ग्रामीण इलाके में बीजेपी आगे

अब अगर दक्षिण गुजरात को देखें तो यहां विधानसभा की कुल 35 सीटें है. यहां के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी कांग्रेस से आगे दिख रही है. ओपनियन पोल के आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस को जहां 42 फीसदी वोट मिलता दिख रहा है वहीं बीजेपी को 44 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है.

दक्षिण गुजरात के शहरी इलाकों में बीजेपी कांग्रेस से पिछड़ती नजर आ रही है. कांग्रेस को जहां 43 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है वहीं बीजेपी को सिर्फ 36 फीसदी वोट मिलता दिख रहा है.

मध्य गुजरात में बीजेपी-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर

हालांकि बात अगर मध्य गुजरात की करें तो यहां विधानसभा की 40 सीटें हैं. मध्य गुजरात में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मात्र 1 फीसदी वोट का अंतर दिख रहा है. बीजेपी को जहां 41 फीसदी वोट मिल सकता है वहीं कांग्रेस को 40 फीसदी वोट मिलने की संभावना है. हालांकि मध्य गुजरात के ग्रामीण इलाके में कांग्रेस आगे हैं और उसे 47 फीसदी वोट मिल सकते हैं जबकि बीजेपी को सिर्फ 43 फीसदी वोट मिलने की ही संभावना जताई गई है. गुजरात के अगर इन चार क्षेत्रों के वोट शेयर को मिला दें तो पता दोनों ही पार्टियों को बराबर वोट शेयर 43-43 फीसदी मिलता दिख रहा है. ऐसे में 9 और 14 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर तय है.

पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की लोकप्रियता में आई कमी

खासबात यह है कि ओपनियन पोल के मुताबिक राज्य में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की लोकप्रियता में भी कमी आई है. अगस्त में हार्दिक की लोकप्रियता 61% थी जबकि अक्टूबर में 64% और नवंबर में यह घटकर 58% रह गई है. यह ओपिनियन पोल एबीपी न्यूज के लिए सर्वे एजेंसी लोकनीति और सीएसडीएस ने 23 से 30 नवंबर के बीच 50 विधानसभा क्षेत्रों के 200 बूथों पर जाकर 3655 लोगों की राय लेकर की है.

अब परमानेंट नोटबंदी की तैयारी, संसद के शीतकालीन सत्र में पेश होगा FRDI बिल-2017

Posted by mp samachar On December - 5 - 2017Comments Off on अब परमानेंट नोटबंदी की तैयारी, संसद के शीतकालीन सत्र में पेश होगा FRDI बिल-2017

rabi-a1-291116सरकार अब परमानेंट नोटबंदी की तैयारी में जुट गई है। नोटबंदी और जीएसटी के बाद वित्‍तीय सुधारों पर की ओर मोदी सरकार अब अगला कदम उठाने जा रही है। नये कानून की जद में न सिर्फ बैंक बल्कि बचत खाता धारक सामान्‍य नागरिक भी आएगा। नये कानून का मसौदा संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करने की पूरी तैयारी है। चूंकि संसद में एनडीए का बहुमत है तो इसके पारित होकर कानून बनने में भी कोई अड़चन नहीं है।

फाइनेंशियल रेजोल्‍यूशन एंड डिपॉजिट इंश्‍योरेंस बिल-2017 के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। पूरी उम्‍मीद है कि यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश कर दिया जाएगा। यह बिल मानसून सत्र में एक बार पेश किया जा चुका है। उस समय इसे संयुक्‍त संसदीय समिति के पास सुझाव के लिए भेजा गया था। समिति के सुझावों को देखते हुए अब नया बिल इस सत्र में पेश करने की पूरी तैयारी है। सदन में एनडीए के बहुमत को देखते हुए बिल के पारित होकर कानून बनने की पूरी संभावना है। नये कानून को परमानेंट नोटबंदी जैसा असर होगा।

वित्‍तीय सुधारों में मील का पत्‍थर होगा नया कानून
सरकार का दावा है कि नये कानून आने से सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के बैंक, इंश्‍योरेंस कंपनियां और दूसरी वित्‍तीय संस्‍थानों के दीवालिया होने जैसी समस्‍या से रोकने मदद मिलेगी। इंश्‍योरेंस सेक्‍टर में विदेशी निवेश की मंजूरी, सरकारी बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन और बैंकिंग में बड़े रिफॉर्म की शुरुआत होगी। इससे देश के फाइनेंशियल सेक्‍टर में एक ढांचा तैयार होगा जो वित्‍तीय सुधारों की ओर एक अहम कदम होगा।

नये कानून से परमानेंट नोटबंदी के बनेंगे हालात
अभी तक जो कानून है उसके अनुसार कोई बैंक बीमार घोषित होता है तो सरकार अपने खजाने से बैंकों को बेलआउट पैकेज देती है। सरकार के पैसे ही बैंक दोबारा खड़ा होने की कोशिश करता है। लेकिन अब नये कानून में यह प्रावधान खत्‍म कर दिया जाएगा। अब बीमार बैंकों को बेलआउट पैकेज सरकार नहीं देगी बल्कि उन्‍हें बेलइन के सहारे खुद को दोबारा उठ खड़े होने की कोशिश करनी होगी। इसका मतलब यह हुआ है कि बैंक में जमा ग्राहकों के पैसे निकालने की सीमा तय कर दी जाएगी।

हमेशा लटकती रहेगी नोटबंदी की तलवार
यह उस हालत में किया जाएगा जब बैंक बीमार हो जाएगा और अपना नॉन परफार्मिंग असेट यानी एनपीए के अंतर को पाटने की कोशिश करेगा। मान लीजिए कि आपका एक लाख रुपये बैंक में जमा है। उस बैंक का एनपीए बढ़ जाने से वह बीमार घोषित होता है तो एफआरबीआई तय करेगा कि ग्राहक अपने खाते से कितनी राशी निकाल सकता है। बैंकों के बीमार होने के बावजूद अभी तक आप अपने खाते से पूरी रकम निकाल सकते हैं। लेकिन नये कानून के लागू होने के बाद आप पर हमेशा नोटबंदी की तलवार लटकती रहेगी।

क्‍या है कानून और कैसे करेगा काम
एफआरडीआई कानून से पहले एक ऐसा ही कानून देश में पहले से काम कर रहा है। इसका नाम है डिपॉजिट इंश्‍योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन। इस कानून के तहत ही ग्राहकों का बैंकों में जमा रकम सुरक्षित रहती है। यानी बैंक दीवालिया हो जाए या बीमार हो जाए इसके बावजूद उसकी एक लाख रुपये तक की जमा रकम सुरक्षित रहती है। यही वजह है कि देश के बैंकों में धन जमा करना आम ग्राहकों के बीच सुरक्षित और विश्‍सनीय माने जाते हैं।

मैं लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगा : शरद यादव

Posted by mp samachar On December - 5 - 2017Comments Off on मैं लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगा : शरद यादव

sharad-yadav_650x400_61503835411 (1)नई दिल्ली: शरद यादव ने मंगलवार को राज्य सभा से अयोग्य करार दिए जाने के एक दिन बाद लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई. शरद ने ट्वीट किया, “मुझे राज्यसभा से अयोग्य घोषित किया गया क्योंकि बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को हराने के लिए बनाए गए महागठबंधन को 18 महीने बाद सत्ता में बने रहने के लिए तोड़ दिया गया. अगर इस गैर-लोकतांत्रिक कार्यशैली के खिलाफ बोलना मेरी गलती है तो मैं लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगा.”

शरद ने पुष्टि की कि सोमवार रात उन्हें एक नोटिस भेजा गया. उन्होंने कहा, “मुझे मेरी पत्नी ने सूचित किया था कि रात लगभग 10 बजे एक नोटिस आया था.” उन्होंने कहा कि नोटिस 15 पृष्ठों से अधिक का है, इसलिए वह इस पर बाद में टिप्पणी करेंगे.

उपराष्ट्रपति व राज्यसभा अध्यक्ष एम. वैंकेया नायडू ने सोमवार को यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता रद्द कर दी थी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाले जद (यू) गुट ने यादव और अंसारी की अयोग्यता के लिए याचिका दायर की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई. नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ फिर से जुड़ने के लिए राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस संग अपने महागठबंधन को तोड़ दिया था, जिसके बाद शरद, अंसारी और जदयू का एक धड़ा नीतीश से अलग हो गया था. पिछले महीने निर्वाचन आयोग ने नीतीश कुमार की अगुवाई वाले गुट को ही असली पार्टी बताया था और उसे चुनाव चिन्ह तीर का इस्तेमाल करने की अनुमति भी दी थी.

LIVE: SC में जस्टिस मिश्रा की अगुवाई में अयोध्या मामले की सुनवाई शुरू

Posted by mp samachar On December - 5 - 2017Comments Off on LIVE: SC में जस्टिस मिश्रा की अगुवाई में अयोध्या मामले की सुनवाई शुरू

04_12_2017-scaytअयोध्या के राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई शुरू हो गई है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच अाज से नियमित सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में शिया वक्फ बोर्ड ने मंदिर का समर्थन किया। वहीं वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट के सामने इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों को पढ़ा अौर कहा कि सभी सबूत कोर्ट के सामने पेश नहीं किए गए।

उत्तर प्रदेश राज्य के प्रतिनिधित्व कर रहे अडिशनल सॉलिसिटिर जनरल तुषार मेहता ने कपिल सिब्बल के सभी दावों को गलत बताया। मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सभी संबंधित दस्तावेज और जरूरी अनुवादित कॉपियां जमा की जा चुकी हैं।

कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने 5 जजों की बेंच से सुनवाई की मांग की। उन्होंने 2019 के आम चुनाव के बाद सुनवाई की मांग की। कहा कि 2019 के आम चुनाव में इस मसले को उठाया जा सकता है।

अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। वहीं, दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी है। इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई करने की बात कही थी।

अयोध्या के विवादास्पद ढांचे को लेकर हाई कोर्ट ने जो फैसला दिया था उसके बाद तमाम पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई थी और याचिका सुप्रीम कोर्ट में 6 साल से लंबित है। पिछले साल 26 फरवरी को भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी को इस मामले में पक्षकार बनाया गया था। स्वामी ने राम मंदिर निर्माण के लिए याचिका दायर की थी।
11 अगस्त को 3 जजों की स्पेशल बेंच ने अयोध्या मामले की सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट में 7 साल बाद अयोध्या मामले की सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने कहा था कि 7 भाषा वाले दस्तावेज का पहले का अनुवाद किया जाए। कोर्ट से साथ ही कहा कि वह इस मामले में आगे कोई तारीख नहीं देगा।
वहीं इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल और राजीव धवन होंगे और रामलला का पक्ष हरीश साल्वे रखेंगे। कोर्ट देखेगा कि दस्तावेजों का ट्रांसलेशन पूरा हुआ है या नहीं। ट्रांसलेशन नहीं होने पर पेच फंस सकता है, लेकिन अदालत कह चुकी है कि अब सुनवाई नहीं टलेगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

28 साल सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो एक के बहुमत से 30 सितंबर, 2010 को जमीन को तीन बराबर हिस्सों रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में बांटने का फैसला सुनाया था। भगवान रामलला को वही हिस्सा दिया गया, जहां वे विराजमान हैं। हालांकि, हाई कोर्ट का फैसला किसी पक्षकार को मंजूर नहीं हुआ और सभी 13 पक्षकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2011 को अपीलों को विचारार्थ स्वीकार करते हुए मामले में यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया था, जो यथावत लागू है।

विवादित ढांचे के नीचे हैं मंदिर के साक्ष्य

विवादित ढांचे के नीचे हिंदू मंदिर होने के साक्ष्य मिले हैं। 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के तीन में से दो न्यायाधीशों जस्टिस सुधीर अग्रवाल और धर्मवीर शर्मा ने अपने फैसले में माना कि अयोध्या में विवादित ढांचा हिंदू मंदिर तोड़ कर बनाया गया था। दोनों जजों के फैसले का आधार भारत पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की रिपोर्ट है। एएसआइ की रिपोर्ट कहती है कि विवादित ढांचे के नीचे हिंदू मंदिर था। मस्जिद बनाने में मंदिर के अवशेषों का इस्तेमाल हुआ था। हालांकि, तीसरे न्यायाधीश एसयू खान के अनुसार, इस बात का कोई सुबूत नहीं मिलता कि बाबर ने मस्जिद किसी मंदिर को तोड़ कर बनाई थी। उन्होंने ये जरूर माना कि मस्जिद का निर्माण बहुत पहले नष्ट हो चुके मंदिर के अवशेषों पर हुआ था।

हिंदू संगठनों की दलील

-श्रीरामलला विराजमान और हिंदू महासभा आदि ने दलील दी है कि हाई कोर्ट ने भी रामलला विराजमान को संपत्ति का मालिक बताया है।

-वहां पर हिंदू मंदिर था और उसे तोड़कर विवादित ढांचा बनाया गया था। ऐसे में हाई कोर्ट एक तिहाई जमीन मुसलमानों को नहीं दे सकता है।

-यहां न जाने कब से हिंदू पूजा-अर्चना करते चले आ रहे हैं, तो फिर हाई कोर्ट उस जमीन का बंटवारा कैसे कर सकता है?

मुस्लिम संगठनों की दलील

-सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि बाबर के आदेश पर मीर बाकी ने अयोध्या में 528 में 1500 वर्गगज जमीन पर मस्जिद बनवाई थी।

-इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता है। मस्जिद वक्फ की संपत्ति है और मुसलमान वहां नमाज पढ़ते रहे।

-22 और 23 दिसंबर 1949 की रात हिंदुओं ने केंद्रीय गुंबद के नीचे मूर्तियां रख दीं और मुसलमानों को वहां से बेदखल कर दिया।

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