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Archive for the ‘राजनीति’ Category

अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले- ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द से किया देश को बदनाम

Posted by reporter On April - 18 - 2018Comments Off on अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले- ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द से किया देश को बदनाम

amitबेंगलुरू में एक सभा को संबोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कई सालों तक कांग्रेस ने भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद शब्दों का इस्तेमाल करके दुनियाभर में देश को बदनाम किया। उन्होंने आगे कहा कि राहुल जी आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है, अब कांग्रेस कहती है कि हम इन शब्दों का इस्तेमाल कभी नहीं करते। सीएम सिद्धारमैया सहित कांग्रेस के कई नेताओं ने इन शब्दों का उपयोग किया है।

अमित शाह ने कहा कि एक बार जब भाजपा के दो सांसद थे तब राजीव गांधी जी ने हमें ताना मार था कि भाजपा ‘हम दो और हमारे दो’ में विश्वास करती है। आज संसद में भाजपा का पूर्ण बहुमत है, 1600 से अधिक विधायक हैं, 20 राज्यों में और कई स्थानीय निकायों और नगर पालिकाओं में भाजपा है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कर्नाटक सीएम उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा ने बेंगलुरु में बसवेश्वर की मूर्ति को फूलों को हार पहनाया। इसके बाद भाजपा अध्यक्ष कन्नड़ लेखक और इतिहासकार एम चिदानंद मूर्ति से बेंगलुरु में मिले। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आज से दो दिवसीय कर्नाटक दौरे पर हैं। वह इन दो दिनों में बेंगलुरु संभाग का दौरा करेंगे।

भाजपा अध्यक्ष दोपहर 12 से 1.15 बजे के बीच बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड में शक्ति केन्द्र प्रमुखों के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और शाम 4 बजे होटल 37 क्रिसेंट में क्षेत्रिय अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। फिर शाम 5 से 6.45 बजे के बीच होसकोट में रोड शो करेंगे।

शाह अपने दौरे के दूसरे दिन प्रदेश के पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिलेंगे। शाह इसके साथ ही राज्य के उद्योगपतियों और व्यापारियों से भी मुलाकात करेंगे और उनसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि बीजेपी ने कर्नाटक में कांग्रेस के खिलाफ एक आक्रामक कैम्पेन की शुरुआत की है जिसको लेकर अमित शाह के लगातार दौरे हो रहे हैं। बता दें कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए 12 मई को मतदान होगा, मतगणना 15 मई को होगी।

योगी सरकार की छवि को ये 8 मुद्दे पहुंचा रहे हैं नुकसान, 2019 में बीजेपी कैसे बचाएगी अपना गढ़

Posted by mp samachar On April - 17 - 2018Comments Off on योगी सरकार की छवि को ये 8 मुद्दे पहुंचा रहे हैं नुकसान, 2019 में बीजेपी कैसे बचाएगी अपना गढ़

yogi-adityanath-government-government-facing-these-issues-beforeनई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ जीतकर आई बीजेपी को सरकार बनाए एक साल से ज्यादा का वक्त हो गया है. अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव. 2014 में 71 सीटें जीतने वाली बीजेपी को इन सीटों को बचाना है. इसका सारा दारोमदार सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ के कंधों पर है. लेकिन सपा और बसपा के साथ चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद अब राज्य का सियासी अंकगणित बीजेपी के साथ जाता नहीं दिखाई दे रहा है. इसका नतीजा हम हाल ही में हुए उपचुनाव में देख चुके हैं. इसी बीच कई ऐसे मामले में सामने आए हैं जिनसे योगी सरकार की छवि पर गहरा असर पड़ा है.

1- उन्नाव रेप कांड में उठे सवाल
उन्नाव रेप कांड का मामला सामने आने के बाद जिस तरह से आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को खुलेआम घूम रहे और पूरा प्रशासन उनके आगे नतमस्तक पड़ा रहा उससे कई सीएम योगी की मजबूत छवि पर सवाल उठे हैं. लोगों के बीच संदेश दिया गया कि सरकार खुद ही विधायक को बचाने में लगी रही है. पीड़िता की ओर से की गई मुख्यमंत्री से शिकायत भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. लेकिन जब दबाव बढ़ा तो सीबीआई जांच की सिफारिश की गई लेकिन इसी बीच हाईकोर्ट ने भी राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठा दिए. विधायक इस समय जेल में हैं और सीबीआई जांच जारी है. लेकिन यह काम काफी पहले हो जाना चाहिए था.

भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने पहले नाइट क्लब का उद्घाटन किया, फिर जांच करने के लिए एसएसपी को लिखा पत्र

Posted by mp samachar On April - 17 - 2018Comments Off on भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने पहले नाइट क्लब का उद्घाटन किया, फिर जांच करने के लिए एसएसपी को लिखा पत्र

Sakshi-Maharaj-in-Nightclub-620x400लखनऊ | उन्नाव से भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने पहले लखनऊ में एक नाइट क्लब का उद्घाटन किया। फिर विवादों में घिरने पर जांच के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है। साक्षी महाराज का कहना है कि उनसे रेस्टोरेंट बताकर उद्घाटन कराया गया था। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि जिसका वह उद्घाटन कर रहें है वह नाइट क्लब है। पार्टी के पूर्व महासचिव रंजन सिंह चौहान रेस्टोरेंट का उद्घाटन करने के लिए साथ लेकर आए थे। मुझे खुद मीडिया से पता चला कि वह नाइट क्लब है। जबकि कुछ लोग इसे हुक्का बार बता रहे हैं। बता दें कि साक्षी महाराज ने लखनऊ के अलीगंज में एक नाइट क्लब का शुभारंभ किया था। लखनऊ एसएसपी को लिखे खत में साक्षी महाराज ने बताया है कि उन्होंने रेस्टोरेंट के मालिक से लाइसेंस मांगा है। लेकिन वो लाइसेंस देने में असमर्थ है। सांसद ने आशंका जताई कि वहां सब कुछ अनाधिकृत तौर पर चलाया जा रहा है।

राहुल गांधी क्या जानें संविधान का सम्मान : मलिक

Posted by mp samachar On April - 17 - 2018Comments Off on राहुल गांधी क्या जानें संविधान का सम्मान : मलिक

2018_4image_08_34_12297687812-llचंडीगढ़ जिस कांग्रेस पार्टी ने भारत के संविधान की धज्जियां उड़ाईं, सत्ता में रहने के लिए जातिवाद, अल्पसंख्यकवाद आदि हर तरह के हथकंडे अपनाए, देश मेें परिवारवाद को खूब आगे बढ़ाया उसके अध्यक्ष राहुल गांधी के मुख से संविधान बचाओ मुहिम की घोषणा किसी मजाक से कम नहीं। यह कहना है भाजपा पंजाब के अध्यक्ष श्वेत मलिक का।

उन्होंने कहा कि बचाना है तो सबसे पहले कांग्रेस पार्टी के संविधान को गांधी-नेहरू परिवार से बचाना होगा। क्या कारण है कि आजादी के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर अधिकतर समय गांधी-नेहरू परिवार का ही कब्जा रहा है? श्वेत मलिक ने कहा कि राहुल गांधी क्या जानें संविधान का सम्मान। चुनाव करवाकर अध्यक्ष बने दलित नेता सीता राम केसरी को जिस तरह कांग्रेस पार्टी के अपने संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए अध्यक्ष पद से हटा, धक्के मारकर पार्टी कार्यालय से बाहर निकाला व सोनिया गांधी को अध्यक्ष थोपा। राहुल जी बताएं कि क्या यह कांग्रेस के संविधान का और दलितों का अपमान नहीं था? मलिक ने कहा कि राहुल गांधी वर्ष 2013 का वह दिन याद करें जब उन्होंने भारत के संविधान की धज्जियां उड़ाई थीं, जब उन्होंने दबंग तरीके से कुर्ते की बाजुएं ऊपर करते हुए अपनी ही कांग्रेस सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट द्वारा जारी आर्डीनैंस को फाड़कर कूड़ेदान में फैंक दिया था।

एससी-एसटी एक्ट पर फैसले से कमजोर पड़ा कानून, देश में आक्रोश और बेचैनी का माहौल

Posted by mp samachar On April - 13 - 2018Comments Off on एससी-एसटी एक्ट पर फैसले से कमजोर पड़ा कानून, देश में आक्रोश और बेचैनी का माहौल

downloadकेंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 पर उसके हालिया आदेश से देश को भारी नुकसान हुआ है। फैसले से देश में आक्रोश, बैचेनी का भाव पनपा है। सामाजिक समरसता को भी गहरी चोट पहुंची है। सरकार ने 20 मार्च के आदेश को वापस लेने की गुहार लगाई है।
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को दी लिखित दलील में दावा किया कि फैसले ने एससी-एसटी एक्ट को कमजोर किया है। साथ ही कहा कि 20 मार्च का वह आदेश वापस लिया जाए, जिसमें एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच और आरोपी को गिरफ्तारी से संरक्षण दिया गया था। 20 मार्च को अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के दुरुपयोग के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने अधिनियम के तहत मिलने वाली शिकायत पर स्वत: एफआईआर और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। साथ ही अग्रिम जमानत के प्रावधान को जोड़ दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच होनी चाहिए। साथ ही सरकारी अधिकारियों की गिरफ्तार से पहले नियुक्त करने वाली अथॉरिटी से अनुमति लेनी होगी। 3 अप्रैल की सुनवाई में जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और यूयू ललित की पीठ ने कहा था कि हमने अधिनियम के किसी भी प्रावधान को कमतर नहीं किया है। जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं उन्होंने हमारे आदेश को पढ़ा नहीं है। पीठ ने सभी पक्षकारों को लिखित दलीलें पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई टाल दी थी।

एससी-एसटी कानून के खिलाफ है आदेश: केंद्र

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि आदेश को लेकर देश में बड़े पैमाने पर भ्रम की स्थिति है। लिहाजा, इसमें सुधार की जरूरत है। एससी-एसटी वर्ग के लोग सताए हुए हैं। इस आदेश के बाद संबंधित मामले में पुलिस का रवैया टालमटोल वाला होगा। मुकदमे दर्ज नहीं होंगे। सरकार ने कहा है कि शीर्ष अदालत का फैसला एससी-एसटी अधिनियम के विपरीत है और तत्काल एफआईआर व अग्रिम जमानत न होने के कानून के उलट है।

अदालत नहीं बना सकती कानून: केंद्र

सरकार ने कहा कि संविधान में कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका का अधिकार निहित है। अदालत कानून नहीं बना सकती। अदालत ने अपने आदेश से कानून में ही संशोधन कर दिया है, जबकि अदालत न्यायिक स्तर पर कानून में संशोधन भी नहीं कर सकती।

अाधी रात को राहुल गांधी के कैंडल मार्च में धक्का मुक्की, भड़की प्रियंका गांधी

Posted by mp samachar On April - 13 - 2018Comments Off on अाधी रात को राहुल गांधी के कैंडल मार्च में धक्का मुक्की, भड़की प्रियंका गांधी

priyanka_gandhi_protesनई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उन्नाव और जम्मू-कश्मीर के कठुआ दुष्कर्मकांड के विरोध में गुरुवार रात 12 बजे कांग्रेस ने मान सिंह रोड से इंडिया गेट तक कैंडल मार्च निकाला। भारी भीड़ में प्रियंका को काफी परेशानी हुई और उनसे धक्का मुक्की भी हुई। इसके बाद प्रियंका गांधी ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को जमकर खरीखोटी सुनाई। मार्च के दौरान प्रियंका को चारों तरफ से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने घेर लिया था और भीड़ के कारण वो बाहर नहीं निकल पा रहीं थीं। धक्का-मुक्की के दौरान वे डर गईं। वीडियो में डरी हुईं प्रियंका कोहनी मारकर आगे बढ़ते हुए दिखाई दीं।

इस दौरान उनकी बेटी भी भीड़ में फंस गईं थी और डरकर रोने लग गई थी, जिसके बाद प्रियंका बैरीकेड को धक्का देते हुए आगे बढ़ीं और अपनी बेटी को चुप कराकर गले लगाया और भीड़ से बाहर निकाला।

प्रियंका ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर आग-बबूला होते हुए कहा कि आप खुद से पूछिए आप यहां क्या करने आए हैं और क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिसे धक्का मारना है वो घर चला जाए, नहीं तो शांति के साथ आगे आएं।

प्रियंका ही नहीं, राहुल गांधी को भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। इसके बाद एसपीजी ने राहुल को कुछ देर के लिए गाड़ी में बैठा लिया। हालांकि, इसके बाद राहुल बाहर आए और वहां मौजूद लोगों से बातचीत की।

पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुआई में निकाले गए कैंडल मार्च में प्रियंका वाड्रा, राबर्ट वाड्रा, उनकी बेटी के साथ अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, सलमान खुर्शीद, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन, रणदीप सिंह सुरजेवाला, अशोक गहलोत, अंबिका सोनी सहित कई कांग्रेस नेता शामिल हुए। लोगों ने दुष्कर्म के आरोपितों को सजा देने का आह्वान करते हुए केंद्र, उत्तर प्रदेश व जम्मू-कश्मीर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

इससे पहले राहुल गांधी ने गुरुवार रात लगभग सवा नौ बजे ट्वीट कर लोगों से इंसाफ की लड़ाई में शामिल होने की अपील की थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उन्नाव और कठुआकांड के दुष्कर्म आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस के दबाव में कठुआ दुष्कर्म के आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ, लेकिन भाजपा के मंत्री उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, माकन ने कहा कि दुष्कर्म पीडि़ता और उनके परिवार के लोग इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सरकार सो रही है। उसे जगाने के लिए रात 12 बजे मार्च निकाला जा रहा है।

होमदेश डिफेंस एक्सपो: शांति को लेकर हमारी प्रतिबद्धता उतनी ही मजबूत है जितना जनता का सीमा की सुरक्षा को लेकर निश्चय-पीएम

Posted by mp samachar On April - 12 - 2018Comments Off on होमदेश डिफेंस एक्सपो: शांति को लेकर हमारी प्रतिबद्धता उतनी ही मजबूत है जितना जनता का सीमा की सुरक्षा को लेकर निश्चय-पीएम

44444-1-620x400डिफेंस एक्सपो 2018 का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यहां पर करीब 500 से ज्यादा कंपनियों और 150 से ज्यादा विदेशी कंपनियों को देखकर उन्हें काफी खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि यहां पर करीब 40 से ज्यादा आधिकारिक तौर पर प्रतिनिधिमंडल भेजे गए हैं।

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि शांति का लेकर हमारा संकल्प ठीक उसी तरह है जैसे हमारे लोगों को हमारे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर है। इसके लिए सामरिक तौर पर स्वतंत्र डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉम्प्लैक्स सहित हम अपने जवानों के लिए सभी आवश्यक कदम उठाकर उन्हें साजोसामान से लैस करने को तैयार है।

रक्षा खरीद को लेकर लिए लिए बड़े निर्णय

डिफेंस एक्सपो में रक्षा साजो सामान की खरीद में लेट लतीफी को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि आप याद करिए लड़ाकू विमानों की खरीद की लंबी प्रक्रिया को जो कभी अपने अंजाम तक नहीं पहुंची। हमने अपनी फौरन जरूरतों को देकते हुए ना सिर्फ बड़े निर्णय लिए बल्कि 110 नए लड़ाकू विमानों की खरीद की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

लेटलतीफी का अंजाम हमने देखा है

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह एक समय था जब नीतियों के चलते महत्वपूर्ण रक्षा तैयारियों में रूकावट आती थी। उन्होंने देखा कि लेटलतीफी, अक्षमता और कुछ छिपे स्वार्थों के चलते हुए नुकसान को देखा है। ये अब नहीं है और फिर से दोबारा कभी नहीं होगा।

उधर, इस मौके पर रक्षामंत्री निर्मला सीता रमन ने कहा कि यहां की प्रदर्शनी में 50 फीसदी से ज्यादा का उत्पादन भारतीय उत्पादकों ने किया है। इनमें से ज्यादातर छोटे और मध्यम उद्योग के हैं। इस बार इस वर्ष डिफेंस एक्सपो की थीम है ‘भारत-उभरता रक्षा विनिर्माण हब’। इस दौरान रक्षा प्रणालियों और इनके कलपुर्जो के निर्यात में भारत की क्षमता को दर्शाया जाएगा। आपको बता दें कि पीएम मोदी के चेन्नई दौरे के दौरान भी उनका विपक्ष के खिलाफ उपवास जारी है।

हालांकि, पीएम के चेन्नई पहुंचते ही कुछ प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाए। प्रधानमंत्री के इस दौरे का कई संगठन विरोध भी कर रहे हैं। इनमें तमिल आर्ट्स एंड कल्चर फोरम, MDMK नेता वाइको, TVK नेता वेलमुरुगन के अलावा डीएमके नेता भी शामिल होंगे। सभी संगठन कावेरी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

UP: जानिए, सीएम योगी के मंत्रियों से क्यों नाराज हुए अमित शाह

Posted by mp samachar On April - 12 - 2018Comments Off on UP: जानिए, सीएम योगी के मंत्रियों से क्यों नाराज हुए अमित शाह

12_04_2018-amit-shaभाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का बुधवार को एक दिन का लखनऊ प्रवास शाह के कठिन दिनों में से एक साबित हुआ। वैसे तो अमित शाह इस दौरे पर 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हुए सपा-बसपा गठबंधन की थाह और प्रदेश में सरकार के एक साल के कामकाज की समीक्षा करने आए थे, लेकिन यहां सरकार में छिड़े अन्तर्द्वंद्व और कुछ मंत्रियों के कामकाज ने उन्हें निराश किया। इस बैठक से संकेत निकले हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो कुछ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

अमित शाह ने सरकार को एकता का पाठ पढ़ाते हुए आपसी सामंजस्य और समन्वय पर बल दिया। यह समझाने, सहयोगी दलों के मुखिया लोगों से मिलने और संगठन के शीर्ष नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श करने में साढ़े नौ घंटे लग गए। सीएम आवास पर उनकी बैठक एक बजे शुरू हुई और 10.30 पर सीएम आवास से निकल कर एयरपोर्ट गए।

यही नहीं वह बैठक इतने उलझे कि प्रदेश कार्यालय पर पार्टी के प्रदेश महामंत्रियों के साथ बैठक भी सीएम आवास पर ही कर ली गई। उन्हें दिल्ली रवाना होने में ढाई घंटे विलंब हो गया। मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पांच कालीदास मार्ग पर आए अमित शाह जब मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डा.दिनेश शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा.महेन्द्र नाथ पाण्डेय, महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल और प्रदेश के सह प्रभारी शिव प्रकाश के साथ बैठ कर सरकार की उलझी गुत्थियों को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, तो उसी समय भाजपा के विधायक व कथित गैंगरेप आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर का सवाल भी मुंह बाए खड़ा था। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ कहा कि बिना विलंब किए आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करें।

कोर ग्रुप के साथ बैठक में वे सरकार में शीर्ष पर बैठे नेताओं के आपसी तालमेल पर जोर देते रहे। उन्होंने साफ किया कि अगर एक होकर नहीं रहे तो विपक्षी हावी होंगे। शाह खासतौर से आधा दर्जन मंत्रियों के कामकाज से खासे नाराज दिखे लेकिन बाकी अन्य मंत्रियों को पुचकारा भी नहीं। उन्होंने लगभग सभी मंत्रियों की क्लास ली। भाजपा अध्यक्ष ने कुछ मंत्रियों को लफ्फाजी न कर जमीन पर उतर कर काम करने की नसीहत दी ताकि जनता और विधायकों दोनों को संतुष्ट किया जा सके।

शाह ने बाद में सांगठानिक कार्यों पर भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री (संगठन) समेत महामंत्रियों के साथ भी विचार-विमर्श किया। इसके अलावा विधान परिषद की 13 सीटों में से भाजपा के खाते में जाने वाली 11 सीटों के प्रस्तावित प्रत्याशियों के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने प्रत्याशियों के चयन में जातीय समीकरण को तवज्जो देने की हिदायत दी। साथ ही मंत्रिमंडल के पुनर्गठन पर अमित शाह ने अपनी हरी झंडी दे दी है। हिदायत दी है कि मंत्रिमंडल के साथ ही संगठन में भी साफ सुथरी छवि के लोगों को शामिल किया जाए।

चंपारण: जिस आदमी ने गांधी की जान बचाई, देश और सिस्टम उसे भूल गया

Posted by mp samachar On April - 10 - 2018Comments Off on चंपारण: जिस आदमी ने गांधी की जान बचाई, देश और सिस्टम उसे भूल गया

BATAKH-MIYAN-GANDHI-CHAMPARAN‘हजार बार जमाना इधर से गुजरा है- नई नई सी है कुछ तेरी रहगुजर फिर भी-’ इतिहास का मामला कुछ ऐसा ही है- बहुत पुराना लेकिन एकदम नया! इतिहास की शाहराह से चाहे जितनी बार गुजरो, यादों की किसी ना किसी गली से गुजरना बाकी ही रह जाता है!

मिसाल के लिए ‘चंपारण-सत्याग्रह’ को ही याद करें. यह देश की आजादी की ‘संघर्ष-यात्रा’(राष्ट्रवादी इतिहास) में मील के एक पत्थर की तरह आता है. ‘मैं आया, मैंने देखा और मैंने जीत लिया’ कि तर्ज पर चंपारण में चले संघर्ष को एक अकेले गांधी की विजय-यात्रा के निर्णायक पड़ाव की तरह देखा जाता है. मान लिया जाता है कि चंपारण सत्याग्रह से इस देश की आजादी के लड़ाई ने जन-आंदोलन की शक्ल अख्तियार की और गांधी को आगे के लिए ‘सत्याग्रह’ (राजनीतिक मुक्ति के लिए सत्य और अहिंसा के प्रयोग) का कारगर हथियार मिला.

और ऐसा मानते हैं तो इसमें कोई बुराई भी नहीं. चंपारण-सत्याग्रह(1917) से पहले गांधी भारत वाले ‘महात्मा गांधी’ कम और दक्षिण अफ्रीका की रंगभेदी सरकार से पूरे बीस साल तक हिन्दुस्तानियों के हक के लिए जूझने वाले ‘बैरिस्टर गांधी’ ज्यादा थे. हिन्दुस्तान में चंपारण उनके सत्याग्रह की पहली जमीन बना. इसके बाद तो जैसे एक सिलसिला-सा बन गया.

याद कीजिए अहमदाबाद में मिल मालिकों के खिलाफ मजदूरों का संघर्ष या फिर खेडा के किसानों का सत्याग्रह. ये दोनों वाकये 1918 में पेश आए. फिर आया 1919 के अप्रैल का महीना- रॉलेट एक्ट के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन चला. और फिर इसके बाद 1920-22 का असहयोग आंदोलन और खिलाफत-आंदोलन दौर. तो एक सिलसिला बनता है, चंपारण के सत्याग्रह के बाद जैसे इस देश की जमीन और जनता दोनों जाग गये थे.

लेकिन क्या चंपारण वाले सत्याग्रही गांधी को सिर्फ अकेले याद किया जा सकता है ? जो गांधी को याद करें तो बतक मियां को कैसे भुल जायें ? बतक मियां ना होते तो फिर चंपारण-सत्याग्रह वाले गांधी भी नहीं होते और जो चंपारण-सत्याग्रह वाले गांधी ना होते तो…?

हां, जिस अनहोनी को सोचकर आपका कलेजा कांप सकता है, उस अनहोनी से तब इस देश को बतक मियां ने बचाया था. बहुतों को शायद आश्चर्य होगा लेकिन गांधी को मारने की एक कोशिश बिहार में हुई थी, तब एक अंग्रेज ने मारना चाहा था उन्हें.

गांधी को मारने की साजिश

बात 1950 के दशक की है. तब डा. राजेन्द्र प्रसाद मोतिहारी(अविभाजित चंपारण का मुख्यालय) आए थे. मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर देश के प्रथम राष्ट्रपति को देखने-सुनने के लिए हजारों की भीड़ जमा थी. ट्रेन से उतरते ही भीड़ के एक कोने से बहुत शोर-गुल उठा. राजेन्द्र प्रसाद की नजर भीड़ के उस कोने पर गई. देखा, एक बुजुर्ग आदमी उनकी तरफ आगे बढ़ने के लिए लोगों से गुत्मगुत्था हो रहा है. राजेन्द्र प्रसाद की आंखों ने पहचान लिया- ये बुजुर्ग कोई और नहीं बतक मियां ही थे.

अफ्रीका में गांधी की सफलता पर एक कार्टून साभार- गांधी दर्शन

अफ्रीका में गांधी की सफलता पर एक कार्टून साभार- गांधी दर्शन
उन्होंने बतक मियां को गले लगाया, हाथ पकड़कर मंच की तरफ ले गये और अपनी बगल की कुर्सी पर बैठाया. इसके बाद उन्होंने वहां जमा भीड़ को एक किस्सा सुनाया, वो किस्सा जिसके गवाह कभी वे खुद बने थे. राजेन्द्र प्रसाद ने लोगों को बताया कि बतक मियां चंपारण-सत्याग्रह के दिनों में एक अंग्रेज नीलहे की कोठी पर रसोईया थे और उस नीलहे अंग्रेज ने बतक मियां से कहा था कि गांधी को जहर देकर मार देना है. लेकिन बतक मियां ईमान के पक्के थे, अपना सबकुछ लुटाकर लेकिन गांधी की जान बचा ली थी.

इस किस्से की तफ्सील कुछ कुछ यों है कि अप्रैल की एक गर्म दुपहरिया में गांधी मुजफ्फरपुर से आने वाली ट्रेन से मोतिहारी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे और पहुंचने के चंद दिनों के बाद एक नीलहे अंग्रेज इर्विन ने उन्हें अपनी कोठी पर दावत के लिए बुलाया. इर्विन ने अपने रसोईये बतक मियां को आदेश दिया कि गांधी को दूध के गिलास में जहर मिलाकर देना है. उसने बतक मियां को इस काम के लिए धमकी दी थी और लालच भी. बतक मियां ने गांधी को जहर मिले दूध का ग्लास दिया जरुर लेकिन इर्विन की जहर बुझी साजिश की सच्चाई भी गांधी और उनके साथ वहां मौजूद लोगों को सुना दी. अपनी साजिश के नाकाम होने से बौखलाये इर्विन ने बतक मियां को नौकरी से निकाल दिया. वे जेल भेज दिए गए. परिवार पर जुल्म हुआ, घर गिरा दिया गया. कहते हैं, दुर्दशा में जी रहे बतक मियां और उनके परिवार को उबारने के लिए राजेन्द्र प्रसाद ने जिले के कलेक्टर को आदेश दिया कि इन्हें 24 एकड़ जमीन दी जाय. और, आजाद भारत की एक सच्चाई यह भी है कि साल 2010 बतक मियां के परिवार जन को यह जमीन नहीं मिल पायी थी.

जब गांधी एक पत्रकार के घर गये

चंपारण-सत्याग्रह की राष्ट्रवादी कहानी से जैसे बतक मियां को भुलाया गया वैसे ही पीर मोहम्मद मूनिस को भी. सब जानते हैं, गांधी को चंपारण जाने के लिए राजी करने वाले राजकुमार शुक्ल थे. गांधी तो उस वक्त तक चंपारण का नाम तक ना जानते थे. राजकुमार शुक्ल ने मनाया था गांधी को नील की खेती करने वाले किसानों की विपदा सुनने के लिए चंपारण आने को. लेकिन कितनों को याद आता है कि चंपारण आने के लिए राजकुमार शुक्ल ने गांधी को जो चिट्ठियां लिखीं— वो सबकी सब पीर मोहम्मद मूनिस की लिखी थीं और चंपारण-सत्याग्रह के मशहूर होने से पहले नीलहे अंग्रेजी की ज्यादती के किस्से मंजर-ए-आम पर लाने का काम पीर मोहम्मद ‘मूनिस’ की कलम कर रही थी?

पीर मोहम्मद बेतिया राज इंग्लिश हाई स्कूल में शिक्षक थे. साथ में पत्रकारिता भी करते थे. अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी के साप्ताहिक अखबार ‘प्रताप’ से उसकी स्थापना(1913) के समय से जुड़ गये थे पीर मोहम्मद. इस अखबार के मार्फत अपने इलाके के किसानों की मुश्किल और उन पर हो रहे अत्याचार की कहानियां सुनाया करते थे. चंपारण-सत्याग्रह के दिनों में भी उन्हीं की कलम से इस इलाके की कहानियां ‘प्रताप’ में छपीं. इस एक्टिविस्ट पत्रकार को अंग्रेजी राज में खतरनाक माना गया. उन्हें नौकरी से निकाला गया. झूठे मुकदमे में फंसाया गया, दस महीने की जेल भी हुई. 1916 में लखनऊ में होने वाले कांग्रेस के वार्षिक सत्र में राजकुमार शुक्ल के साथ पीर मोहम्मद भी गए थे. दोनों ने इसी अधिवेशन में गांधी से भेंट की थी. चंपारण सत्याग्रह के दौरान गांधी पीर मोहम्मद मूनिस की मां से मिलने उनके घर पहुंचे थे. माना जाता है, किसी पत्रकार के घर गांधी की यह एकलौती यात्रा थी.

ब्रिटिश शेर को नमक डालकर पकाते गांधी का कार्टून

ब्रिटिश शेर को नमक डालकर पकाते गांधी का कार्टून
पीर मोहम्मद का सार्वजनिक जीवन चमकदार है. वे बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष चुने गये थे और 1921 से बिहार की प्रदेश कांग्रेस इकाई जुड़े रहे. चंपारण में किसानों और गन्ना मिलों के बीच बिचौलियों को हटाने की मांग उठी तो उन्होंने गन्ना किसानों की हिमायत की. बेतिया नगरपालिका के सफ़ाई कर्मचारियों हड़ताल(1937) में भी योगदान रहा. लेकिन, गांधी के ‘चंपारण-सत्याग्रह’ के सांचे ढले इतिहास के भीतर पीर मोहम्मद ‘मूनिस’ का जिक्र नहीं आता. सोचिए क्यों?

चंपारण-सत्याग्रह के किस्से में किसी किसान का नाम क्यों नहीं?

सौ साल बाद राष्ट्र बीती जिंदगी के पन्ने पलटकर अपने जाग उठने के एक लम्हे के तौर पर चंपारण-सत्याग्रह को देख-परख रहा है तो पीर मूनिस या फिर बतक मियां का नाम तो भूले-भटके फिर भी कहीं ना कहीं दर्ज हो रहा है लेकिन क्या हमें नील की खेती करने को मजबूर किए गए उन किसानों में से किसी का नाम याद आता है जिनकी पीठ पर लगान वसूली के नाम पर जमींदार के कारिन्दे और अंग्रेजी सरकार के अमले लाठी-डंडे बरसाते थे ?

नील के कुल 70 कारखाने थे चंपारण में उस वक्त. तो एक तरह से पूरा इलाका ही नीलहे कोठियों के हुक्म के घेरे में था. नील की खेती अंग्रेजों के लिए फायदेमंद थी और उन्होंने जमींदारी व्यवस्था का सहारा लेकर किसानों को नील की खेती के लिए मजबूर किया. जहां वे जमींदारी (लगान वसूली का अधिकार) हासिल नहीं कर पाते थे वहां बतौर ठेकेदार पट्टे पर जमीन ले लेते थे. अंग्रेज ठेकेदार के रुप में बरताव किसी जमींदार ही की तरह करते थे. चंपारण में बेतिया राज से ठेके पर कई गांवों की जमीन पट्टे पर ली थीं अंग्रेजों ने. तीनकठिया प्रणाली के तहत किसानों को जमीन के सबसे उपजाऊ हिस्से में नील उगाने के लिए मजबूर किया जाता था.

कपड़ों की रंगाई के लिए मिलों में नील की मांग बढ़ती जा रही थी और बढ़ती हुई मांग के हिसाब से नील की खेती करने वाले किसानों पर अंग्रेजों के जुल्म भी बढ़ रहे थे. इस बीच जर्मनी में सिथंटिक नील बन गया. भारत से निर्यात किए जाने वाले नील की कीमत 1894-95 के बीच 4.75 करोड़ रुपये से घटकर 2.96 करोड़ रुपये पर आ गई. और, इसका भार एक बार फिर से चंपारण के किसानों पर लादा गया. लगान 50-60 फीसद बढ़ा दी गई- इसे शरहबेशी कहा गया.

नील के दाम गिर गये थे, किसान इसकी खेती नहीं करना चाहते थे. अंग्रेजों ने इसका भी तोड़ निकाला. कहा, नील की खेती छोड़कर दूसरी फसलों की खेती करना चाहते हो तो ‘तवाना’ देना होगा. ‘तवाना’ को तौर पर वसूली जाने वाली रकम इतनी ज्यादा थी कि किसानों को कर्ज लेना पड़ता था और कर्ज की मूल रकम चुकाने की बात तो छोड़ दें, 12 प्रतिशत की दर से लगने वाले सूद को चुकाने में ही उनकी गृहस्थी खत्म हो जाती थी.

किसानी की लूट का एक और तरीका था- ‘जिरात.’ इसके अंतर्गत किसानों को नील की फैक्ट्री की मिल्कियत वाली खेती की जमीन दी जाती थी और उसपर ऊंचे दर से लगान वसूली जाती थी. किसान ऐसी जमीन को लेने से इनकार नहीं कर सकता था, इनकार की सूरत में उसका किसानी का उसका हक छीन लिया जाता था.पहले विश्वयुद्ध की शुरुआत के बाद(1914) जर्मनी के सिंथेटिक नील की मांग कम पड़ने से भारत से होने वाले नील के उत्पादन ने फिर जोर पकड़ा. चंपारण के किसानों पर जुल्म और बढ़े. उनसे अब बेगारी भी करवायी जाने लगी.

गांधी के चंपारण पहुंचने पर उनके साथी के रुप में जुल्म के मारे ऐसे कई किसानों का बयान खुद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कलमबंद किया था. ऐसे एक किसान-परिवार की विधवा(पति दुधई राय) मुसमात झुनिया(उम्र अस्सी वर्ष) का बयान इतिहासकार शाहिद अमीन ने इंडियन एक्सप्रेस में छपे एक लेख में दर्ज किया है. झुनिया के परिवार को पहले 16 रुपये का लगान देना पड़ता था जिसे बढ़ाकर(शरहबेशी) 26 रुपया कर दिया गया था.

झुनिया के बयान(भोजपुरी) का हिन्दी अनुवाद कुछ यों होगा : . “मैंने लगान की मूल रकम (16 रुपये) कोर्ट में जमा करवा दी थी. मेरा एक लड़का है जो कुछ कमअक्ल है. लेकिन कोठी ने मेरे ऊपर दावा ठोंक दिया. मामले पर अभी सुनवाई चलनी बाकी है लेकिन फैक्ट्री के कारिन्दे रामजी राय और कुछ और लोग मेरे घर आए और हमसे दही और घी देने को कहा. उनके साथ गारद(सिपाही) भी थे. उन लोगों ने मेरे बेटे को मारा और उसकी छाती पर हेंगा(खेती की जुताई में प्रयुक्त लकड़ी का एक पट्टा) रखकर दबाने लगे.

मैं उनके सामने रो पड़ी और उनके सामने 27 रुपये निकालकर रख दिए. मैंने अपनी जमीन मटुक सिंह को बेची जिसने वो रकम कोठी को दे दी. मैंने(जमीन) 49 रुपये में बेची थी. मेरे हिस्से में 27 रुपये आए, इसमें भी मुझे मिले 24 रुपये ही. बाकी के तीन रुपये सिपाही डकार गये. साधुशरण लाल(गांव का पटवारी) ने कोर्ट में जमा पैसों की रसीद मुझसे ले ली.”.( याद रहे, 26 रुपये की रकम तब बहुत बड़ी होती थी. इस तथ्य से हिसाब लगाइए कि गांधी को चंपारण आने का न्यौता देने वाले राजकुमार शुक्ल उन दिनों कर्ज के अपने धंधे से सालाना 1610 रुपये का ब्याज कमाते थे जो आज की तारीख में 4 लाख रुपये के बराबर है.)

दुधई राय की विधवा झुनिया की तरह चंपारण में नीलहों के अत्याचार के शिकार लाखों थे. कहर इन्हीं पर टूटती थी, आशियाना इन्हीं का उजड़ता था. चंपारण के सत्याग्रह में इन्हीं अनाम किसानों के बयान कलमबंद हुए और गांधी की आवाज पर ये ही किसान एकबारगी अपना भय छोड़कर ‘अंग्रेजी राज’ के खिलाफ खड़े हो गए. लेकिन इन किसानों की रामकहानी ना तो गांधी की आत्मकथा में आती है और ना ही राजेन्द्र प्रसाद के.

कोई बतक मियां की तरह होता है- वह अपना सबकुछ लुटाकर भी ईमान पर कायम रहता है. कोई पीर मोहम्मद मूनीस की तरह होता है, वह जनता पर ढाए जा रहे जुल्म से दुनिया को बेखौफ होकर आगाह करता है. कोई राजकुमार शुक्ल की तरह होता है- वह सोचता तो अपने हित की है लेकिन ये भी जानता है कि लोगों का हित साधे बगैर अपना हित नहीं सध सकता. इन सबके बीच होते हैं लाखों अनाम लोग जिनकी जुल्म की मार से उघड़ती जा रही चमड़ी से हमेशा एक ‘आह’ निकलती है—और जब ये सारी चीजें मिल जाती हैं तो ‘गांधी’ के आने से एक आंधी उठती है. फिर उस बवंडर में तख्त और ताज के सारी बनावटें बदल जाती हैं. चंपारण-सत्याग्रह इन सबकी कथा है- एक अकेले गांधी की कथा नहीं. भोजपुरी अंचल में यों ही नहीं कहा जाता आज भी कि- थोड़ कईलें गांधी जी- बहुत कईलें लोगवा.

कर्नाटक विधानसभा चुनावः BJP ने जारी की 72 उम्मीदवारों की लिस्ट

Posted by mp samachar On April - 9 - 2018Comments Off on कर्नाटक विधानसभा चुनावः BJP ने जारी की 72 उम्मीदवारों की लिस्ट

bjp_2617985_835x547-mभारतीय जनता पार्टी ने अगले महीने होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 72 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. बीजेपी ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा को शिकारीपुरा से अपना उम्मीदवार बनाया है. यह सीट येदियुरप्पा के बड़े बेटे बीवाय राघवेंद्र ने अपने पिता के लिए खाली की है. उम्मीद जताई जा रही है कि वह इस बार रनेबेन्नुर सीट से चुनाव लड़ेंगे, फिलहाल इस सीट पर उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की गई है.

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया मैसूर के चामुंडेश्वरी सीट पर चुनाव लड़ने वाले हैं, बीजेपी ने फिलहाल इस सीट पर उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है. वहीं सिद्धारमैया की वर्तमान सीट वरुणा से उनके बेटे यतींद्र चुनाव लड़ने वाले हैं. इस सीट पर भी बीजेपी ने अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है.

बता दें कि कर्नाटक में 12 मई को विधानसभा चुनाव होने हैं और 15 मई को चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे. कर्नाटक कांग्रेस 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए सभी उम्मीदवारों की घोषणा 15 अप्रैल तक एक ही बार में करेगी. पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक 9 और 10 अप्रैल को होगी. केंद्रीय चुनाव कमेटी की बैठक उसके बाद होगी. विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवारों की सूची 15 अप्रैल तक जारी होगी.

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