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Archive for the ‘विविध’ Category

सल्स स्ट्रॉन्ग बनाने की सिर्फ 1 टिप, इस तरह होगा फायदा

Posted by mp samachar On September - 6 - 2017Comments Off on सल्स स्ट्रॉन्ग बनाने की सिर्फ 1 टिप, इस तरह होगा फायदा

strong_muscles_new_cपुरुषों को मसल्स मजबूत बनाने और सिक्स पैक एब्स के लिए अंडे खाना फायदेमंद है। मैक्स हेल्थ केयर, नई दिल्ली की चीफ डाइटीशियन डॉ. रितिका सामदार स्ट्रॉन्ग बॉडी के लिए पुरुषों को रोज अंडे खाने की सलाह देती हैं। वे बता रही हैं स्ट्रान्ग बॉडी के लिए कितने अंडे खाने से फायदा होगा, साथ ही क्या अवॉइड करने से बॉडी बनेगी मजबूत।

जम्‍मू-कश्‍मीर : पुंछ में LoC पर पाक फायरिंग, एक दंपति की मौत-2 बच्‍चे घायल

Posted by mp samachar On July - 8 - 2017Comments Off on जम्‍मू-कश्‍मीर : पुंछ में LoC पर पाक फायरिंग, एक दंपति की मौत-2 बच्‍चे घायल

indian-armyश्रीनगर: पाकिस्‍तानी सेना ने एक बार फिर युद्धविराम का उल्‍लंघन करते हुए नियंत्रण रेखा पर पुंछ सेक्‍टर में अंधाधुंध फायरिंग शुरू की दी. इस फायरिंग में एक परिवार के पति और पत्‍नी की मौत हो गई और उनके दो बच्‍चे घायल हो गए.

पाक सेना ने सुबह तकरीबन छह बजे ऑटोमेटिक छोटे हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी और मोर्टार दागे. भारतीय सेना प्रभावी और सशक्‍त तरीके से जवाब दे रही है. वहीं दूसरी ओर बांदीपुरा में शनिवार तड़के 3:30 बजे आर्मी पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकियों ने हमला कर दिया.

इसमें 3 जवानों के घायल होने की खबर है. घटना बांदीपुरा के हाजिन इलाके की है. हमले के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है. सेना ने आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया हुआ है. घायल जवानों को 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जवानों की स्थिति फिलहाल स्थिर है.

ये घटनाएं ऐसे वक्‍त हुई हैं जब जी-20 शिखर सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम लेते हुए और पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को कहा कि कुछ देश राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आतंकवाद का एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.

मोदी ने जी-20 सदस्य देशों से इस तरह के राष्ट्रों के खिलाफ ऐसा सामूहिक कदम उठाने की मांग की जो ‘प्रतिरोधक’ बन सके. मोदी ने जी-20 शिखर बैठक को संबोधित करते हुए लश्कर और जैश की तुलना आईएसआईएस और अलकायदा से की और कहा कि इनके नाम भले ही अलग हों, लेकिन इनकी विचारधारा एक है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग जैसे विश्व नेताओं की मौजूदगी में मोदी ने इस बात पर अफसोस जताया कि आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ‘कमजोर’ है. उन्होंने कहा कि इस समस्या का मुकाबला करने के लिए और सहयोग की जरूरत है.

इजराइल में पीएम मोदी 26/11 मुंबई हमले के सर्वाइवर 10 वर्षीय मोशे से मिलेंगे

Posted by mpsamachar On July - 5 - 2017Comments Off on इजराइल में पीएम मोदी 26/11 मुंबई हमले के सर्वाइवर 10 वर्षीय मोशे से मिलेंगे

_attack_survivorजराइल दौरे पर गए पीएम नरेंद्र मोदी आज प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहु और राष्ट्रपति रुवन रिवलिन से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे 26/11 मुंबई हमले में बच गए 10 वर्षीय बेबी मोशे होल्त्जबर्ग से भी मिलेंगे, बताया जाता है कि हमले में मारे गए 173 लोगों में नरीमन हाउस में रहने वाले मोशे की मां रिवका और पिता गैवरूल होल्त्जबर्ग भी थे।

जब हमला हुआ तब माता-पिता के साथ 2 साल का मोशे भी वहीं था। अपने माता-पिता के मारे जाने के बाद वह उनके शवों के पास बैठा रो रहा था, तभी उसकी आया ने मोशे की आवाज सुनकर उसे वहां से उठाकर ले गई जिससे उसकी जान बच गई।

क्या थी घटना
बेबी मोशे और उसके इजराइल माता-पिता मुंबई के नरीमन हाउस स्थित चबाड हाउस में मोशे अपने मां-बाप के साथ रहता था, जहां सैंड्रा सैमुअल मोशे की आया के रुप में काम करती थीं। दर्दनाक घटना की चश्मदीद गवाह सैंड्रा सैमुअल ने उस रात की पूरी घटना एक इंटरव्यू में बताई। 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर लश्कर तैयबा के हमले में नरीमन हाउस को भी निशाना बनाया गया था। सैंड्रा ने बताया वह अपने दो बेटों से मिलने हर बुधवार को जाती थीं लेकिन उस रात वह नहीं गई थी।

सैंड्रा का कहना था कि ये भगवान का इशारा था कि उस रात वहां क्या होने वाला था इसलिए मैं वहां रुकी। सैंड्रा आगे बताती हैं कि जब उन्होंने गोलियों की आवाज सुनी तो साथ ही उपर से काफी लोगों की चीखपुकार भी सुनाई देने लगीं। वह बताती हैं कि उन्हें कुछ समझ नहीं आया, उन्होंने फोन का तार निकाल दिया और वो लॉन्ड्री रूम में जाकर छिप गईं।

पूरी रात मैं वहीं रही और अगली सुबह मैं वहां से निकली तभी मुझे बेबी मोशे की आवाज सुनाई पड़ी। मैं उपर के कमरे में गई तो उसके माता-पिता खून से सने फर्श पर पड़े थे। मोशे उनके पास ही बैठा रो रहा था। यह दृश्य देखकर मैंने चुपचाप उसे अपनी गोद में उठाया उठाया चुपचाप उस बिल्डिंग से निकलकर उसकी और अपनी जान बचाई।

प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से नफरत सी करते थे पं नेहरू, अंत्येष्टि का भी किया था बॉयकाट

Posted by mpsamachar On June - 24 - 2017Comments Off on प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से नफरत सी करते थे पं नेहरू, अंत्येष्टि का भी किया था बॉयकाट

Indiatimes-1देश के आजादी मिलने के बाद डॉ.राजेंद्र प्रसाद तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के विरोध और साजिशों के बाद भी जब नेहरू की इच्छा के विरुद्ध बिहार निवासी डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ नेहरू ने कैसा
बर्ताव किया पढ़िये इस प्रामाणिक लेख में।

कांग्रेस के नेतृत्व वाले 17 दलों के गठबंधन ने राष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर बिहार की मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया है।यह वही कांग्रेस है जिसने मीरा कुमार के भाई को एक सेक्स स्कैंडल में फसा कर मीराकुमार के पिता और बिहार के रहने वाले कांग्रेस के सबसे बड़े नेता बाबू जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनने से रोका था।1971 में जब पाकिस्तान से युद्ध हुआ तो बाबू जगजीवन राम रक्षा मंत्री थे।

डॉ राजेंद्र प्रसाद जी के साथ नेहरू ने जो किया, उसको बेनकाब करता राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा जी का लेख। पढिए और अतीत के सत्य का सामना कीजिए।.
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डा. राजेन्द्र प्रसाद की शख्सियत से पंडित नेहरु हमेशा अपने को असुरक्षित महसूस करते रहे। उन्होंने राजेन्द्र बाबू को नीचा दिखाने का कोई अवसर भी हाथ से जाने नहीं दिया। हद तो तब हो गई जब 12 वर्षो तक राष्ट्रपति रहने के बाद राजेन्द्र बाबू देश के राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद पटना जाकर रहने लगे तो नेहरु ने उनके लिए वहां पर एक सरकारी आवास तक की व्यवस्था नहीं की। उनकी सेहत का ध्यान नहीं रखा गया। दिल्ली से पटना पहुंचने पर राजेन्द्र बाबू बिहार विद्यापीठ, सदाकत आश्रम के एक सीलन भरे कमरे में रहने लगे।
उनकी तबीयत पहले से खराब रहती थी, पटना जाकर ज्यादा खराब रहने लगी। वे दमा के रोगी थे। सीलनभरे कमरे में रहने के बाद उनका दमा ज्यादा बढ़ गया। वहां उनसे मिलने के लिए श्री जयप्रकाश नारायण पहुंचे। वे उनकी हालत देखकर हिल गए। उस कमरे को देखकर जिसमें देश के पहले राष्ट्रपति और संविधान सभा के पहले अध्यक्ष डा.राजेन्द्र प्रसाद रहते थे, उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने उसके बाद उस सीलन भरे कमरे को अपने मित्रों और सहयोगियों से कहकर कामचलाउ रहने लायक करवाया। लेकिन, उसी कमरे में रहते हुए राजेन्द्र बाबू की 28 फरवरी,1963 को मौत हो गई।
क्या आप मानेंगे कि उनकी अंत्येष्टि में पंडित नेहरु ने शिरकत करना तक भी उचित नहीं समझा। वे उस दिन जयपुर में एक अपनी ‘‘‘तुलादान’’ करवाने जैसे एक मामूली से कार्यक्रम में चले गए। यही नहीं, उन्होंने राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल डा.संपूर्णानंद को राजेन्द्र बाबू की अंत्येष्टि में शामिल होने से रोका। इस मार्मिक और सनसनीखेज तथ्य का खुलासा खुद डा.संपूर्णानंद ने किया है। संपूर्णानंद जी ने जब नेहरू को कहा कि वे पटना जाना चाहते हैं, राजेन्द्र बाबू की अंत्येष्टि में भाग लेने के लिए तो उन्होंने (नेहरु) संपूर्णानंद से कहा कि ये कैसे मुमकिन है कि देश का प्रधानमंत्री किसी राज्य में आए और उसका राज्यपाल वहां से गायब हो। इसके बाद डा. संपूर्णानंद ने अपना पटना जाने का कार्यक्रम रद्द किया। हालांकि, उनके मन में हमेशा यह मलाल रहा कि वे राजेन्द्र बाबू के अंतिम दर्शन नहीं कर सके। वे राजेन्द्र बाबू का बहुत सम्मान करते थे। डा0 सम्पूर्णानंद ने राजेन्द बाबू के सहयोगी प्रमोद पारिजात शास्त्री को लिखे गए पत्र में अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए लिखा था कि ‘‘घोर आश्चर्य हुआ कि बिहार के जो प्रमुख लोग दिल्ली में थे उनमें से भी कोई पटना नहीं गया। (किसके डर से?)

सबलोगों को इतना कौन सा आवशयक काम अचानक पड़ गया, यह समझ में नहीं आया। यह अच्छी बात नहीं हुई। यह बिलकुल ठीक है कि उनके जाने न जाने से उस महापुरुष भी बनता बिगड़ता नहीं। परन्तु, ये लोग तो निष्चय ही अपने कर्तव्य से च्युत हुए। कफ निकालने वाली मशीन वापस लाने की बात तो अखबारों में भी आ गई हैं मुख्यमंत्री की बात सुनकर आश्चर्य हुआ। यही नहीं, नेहरु ने राजेन्द्र बाबू के उतराधिकारी डा. एस. राधाकृष्णन को भी पटना न जाने की सलाह दे दी। लेकिन, डा0 राधाकृष्णन ने नेहरू के परामर्श को नहीं माना और वे राजेन्द्र बाबू के अंतिम संस्कार में भाग लेने पटना पहुंचे। इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि नेहरू किस कदर राजेन्द्र प्रसाद से दूरियां बनाकर रखते थे।

ये बात भी अब सबको मालूम है कि पटना में डा. राजेन्द्र बाबू को उत्तम क्या मामूली स्वास्थ्य सुविधाएं तक नहीं मिलीं। उनके साथ बेहद बेरुखी वाला व्यवहार होता रहा। मानो सबकुछ केन्द्र के निर्देश पर हो रहा हो। उन्हें कफ की खासी शिकायत रहती थी। उनकी कफ की शिकायत को दूर करने के लिए पटना मेडिकल कालेज में एक मशीन थी ही कफ निकालने वाली। उसे भी केन्द्र के निर्देश पर मुख्यमंत्री ने राजेन्द्र बाबू के कमरे से निकालकर वापस पटना मेडिकल काॅलेज भेज दिया गया। जिस दिन कफ निकालने की मशीन वापस मंगाई गई उसके दो दिन बाद ही राजेन्द बाबू खास्ते-खास्ते चल बसे। यानी राजेन्द्र बाबू को मारने का पूरा और पुख्ता इंतजाम किया गया था ।

दरअसल नेहरु अपने को राजेन्द्र प्रसाद के समक्ष बहुत बौना महसूस करते थे। उनमें इस कारण से बढ़ी हीन भावना पैदा हो गई थी। इसलिए वे उनसे छतीस का आंकड़ा रखते थे। वे डा.राजेन्द्र प्रसाद को किसी न किसी तरह से आदेश देने की मुद्रा में रहते थे जिसे राजेन्द्र बाबू मुस्कुराकर टाल दिया करते थे। नेहरू ने राजेंद्र प्रसाद से सोमनाथ मंदिर का 1951 में उदघाटन न करने का आग्रह किया था। उनका तर्क था कि धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के प्रमुख को मंदिर के उदघाटन से बचना चाहिए। हालांकि, नेहरू के आग्रह को न मानते हुए डा. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर में शिव मूर्ति की स्थापना की थी। डा. राजेन्द्र प्रसाद मानते थे कि ‘‘धर्मनिरपेक्षता का अर्थ अपने संस्कारों से दूर होना या धर्मविरोधी होना नहीं हो सकता।’’ सोमनाथ मंदिर के उदघाटन के वक्त डा. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है लेकिन नास्तिक राष्ट्र नहीं है। डा. राजेंद्र प्रसाद मानते थे कि उन्हें सभी धर्मों के प्रति बराबर और सार्वजनिक सम्मान प्रदर्शित करना चाहिए।
नेहरु एक तरफ तो डा. राजेन्द्र प्रसाद को सोमनाथ मंदिर में जाने से मना करते रहे लेकिन, दूसरी तरफ वे स्वयं 1956 के इलाहाबाद में हुए कुंभ मेले में डुबकी लगाने चले गए। बताते चलें कि नेहरु के वहां अचानक पहुँच जाने से कुंभ में अव्यवस्था फैली और भारी भगदड़ में करीब 800 लोग मारे गए।

हिन्दू कोड बिल पर भी नेहरु से अलग राय रखते थे डा. राजेन्द्र प्रसाद। जब पंडित जवाहर लाल नेहरू हिन्दुओं के पारिवारिक जीवन को व्यवस्थित करने के लिए हिंदू कोड बिल लाने की कोशिश में थे, तब डा.राजेंद्र प्रसाद इसका खुलकर विरोध कर रहे थे। डा. राजेंद्र प्रसाद का कहना था कि लोगों के जीवन और संस्कृति को प्रभावित करने वाले कानून न बनाये जायें।

दरअसल जवाहर लाल नेहरू चाहते ही नहीं थे कि डा. राजेंद्र प्रसाद देश के राष्ट्रपति बनें। उन्हें राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए उन्होंने ‘‘झूठ’’ तक का सहारा लिया था। नेहरु ने 10 सितंबर, 1949 को डा. राजेंद्र प्रसाद को पत्र लिखकर कहा कि उन्होंने (नेहरू) और सरदार पटेल ने फैसला किया है कि सी.राजगोपालाचारी को भारत का पहला राष्ट्रपति बनाना सबसे बेहतर होंगा।नेहरू ने जिस तरह से यह पत्र लिखा था, उससे डा.राजेंद्र प्रसाद को घोर कष्ट हुआ और उन्होंने पत्र की एक प्रति सरदार पटेल को भिजवाई। पटेल उस वक्त बम्बई ) में थे। कहते हैं कि सरदार पटेल उस पत्र को पढ़ कर सन्न थे, क्योंकि, उनकी इस बारे में नेहरू से कोई चर्चा नहीं हुई थी कि राजाजी (राजगोपालाचारी) या डा. राजेंद्र प्रसाद में से किसे राष्ट्रपति बनाया जाना चाहिए। न ही उन्होंने नेहरू के साथ मिलकर यह तय किया था कि राजाजी राष्ट्रपति पद के लिए उनकी पसंद के उम्मीदवार होंगे। यह बात उन्होंने राजेन्द्र बाबू को बताई। इसके बाद डा. राजेंद्र प्रसाद ने 11 सितंबर,1949 को नेहरू को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ‘‘पार्टी में उनकी (डा0 राजेन्द प्रसाद की) जो स्थिति रही है, उसे देखते हुए वे बेहतर व्यवहार के पात्र हैं। नेहरू को जब यह पत्र मिला तो उन्हें लगा कि उनका झूठ पकड़ा गया। अपनी फजीहत कराने के बदले उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करने का निर्णय लिया।

नेहरू यह भी नहीं चाहते थे कि हालात उनके नियंत्रण से बाहर हों और इसलिए ऐसा बताते हैं कि उन्होंने इस संबंध में रातभर जाग कर डा. राजेन्द्र प्रसाद को जवाब लिखा। डा. राजेन्द्र बाबू, प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के विरोध के बावजूद दो कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुने गए थे। बेशक, नेहरू सी राजगोपालाचारी को देश का पहला राष्ट्रपति बनाना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल और कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेताओं की राय डा. राजेंद्र प्रसाद के हक में थी। आखिर नेहरू को कांग्रेस नेताओं सर्वानुमति की बात माननी ही पड़ी और राष्ट्रपति के तौर पर डा. राजेन्द्र प्रसाद को ही अपना समर्थन देना पड़ा।

जवाहर लाल नेहरू और डा. राजेंद्र प्रसाद में वैचारिक और व्यावहारिक मतभेद बराबर बने रहे थे। ये मतभेद शुरू से ही थे, लेकिन, 1950 से 1962 तक राजेन्द्र बाबू के राष्ट्रपति रहने के दौरान ज्यादा मुखर और सार्वजनिक हो गए। नेहरु पश्चिमी सभ्यता के कायल थे जबकि राजेंद्र प्रसाद भारतीय सभ्यता देष के एकता का मूल तत्व मानते थे। राजेन्द्र बाबू को देश के गांवों में जाना पसंद था, वहीं नेहरु लन्दन और पेरिस में चले जाते थे। पेरिस के घुले कपड़े तक पहनते थे। सरदार पटेल भी भारतीय सभ्यता के पूर्णतया पक्षधर थे। इसी कारण सरदार पटेल और डा. राजेंद्र प्रसाद में खासी घनिष्ठता थी। सोमनाथ मंदिर मुद्दे पर डा. राजेंद्र प्रसाद और सरदार पटेल ने एक जुट होकर कहा की यह भारतीय अस्मिता का केंद्र है इसका निर्माण होना ही चाहिए।
अगर बात बिहार की करें तो वहां गांधीजी के बाद राजेन्द्र प्रसाद ही सबसे बड़े और लोकप्रिय नेता थे। गांधीजी के साथ ‘राजेन्द्र प्रसाद जिन्दाबाद’ के भी नारे लगाए जाते थे। लंबे समय तक देश के राष्ट्रपति रहने के बाद भी राजेन्द्र बाबू ने कभी भी अपने किसी परिवार के सदस्य को न पोषित किया और न लाभान्वित किया। हालांकि नेहरु इसके ठीक विपरीत थे। उन्होंने अपनी पुत्री इंदिरा गांधी और बहन विजयालक्ष्मी पंडित को सत्ता की रेवडि़यां खुलकर बांटीं। सारे दूर-दराज के रिष्तेदारों को राजदूत, गवर्नर, जज बनाया।

एक बार जब डा. राजेंद्र प्रसाद ने बनारस यात्रा के दौरान खुले आम काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारियों के पैर छू लिए तो नेहरू नाराज हो गए और सार्वजनिक रूप से इसके लिए विरोध जताया, और कहा की भारत के राष्ट्रपति को ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए। हालांकि डा. राजेन्द्र प्रसाद ने नेहरु की आपत्ति पर प्रतिक्रिया देना भी उचित नहीं समझा। राजेन्द्र प्रसाद नेहरू की तिब्बत नीति और हिन्दी-चीनी भाई-भाई की नीति से असहमत थे। नेहरु की चीन नीति के कारण भारत 1962 की जंग में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। राजेन्द्र बाबू और नेहरु में राज्यभाषा हिन्दी को लेकर भी मतभेद था। मुख्यमंत्रियों की सभा (1961) को राष्ट्रपति ने लिखित सुझाव भेजा कि अगर भारत की सभी भाषाएं देवनागरी लिपि अपना लें, जैसे यूरोप की सभी भाषाएं रोमन लिपि में लिखी जाती हैं, तो भारत की राष्ट्रीयता मजबूत होगी। सभी मुख्यमंत्रियों ने इसे एकमत से स्वीकार कर लिया, किन्तु अंग्रेजी परस्त नेहरू की केंद्र सरकार ने इसे नहीं माना क्योंकि, इससे अंग्रेजी देश की भाषा नहीं बनी रहती जो नेहरू चाहते थे।

वास्तव में डा. राजेंद्र प्रसाद एक दूरदर्शी नेता थे वो भारतीय संस्कृति सभ्यता के समर्थक थे, राष्ट्रीय अस्मिता को बचाकर रखने वालो में से थे।जबकि नेहरु पश्चिमी सभ्यता के समर्थक और, भारतीयता के विरोधी थे। बहरहाल आप समझ गए होंगे कि नेहरु जी किस कद्र भयभीत रहते थे राजेन्द्र बाबू से।
अभी संविधान पर देशभर में चर्चायें हो रही हैं। डा0 राजेन्द्र प्रसाद ही संविधान सभा के अध्यक्ष थे और उन्होंने जिन 24 उप-समितियों का गठन किया था, उन्हीं में से एक ‘‘मसौदा कमेटी’’ के अध्यक्ष डा0 भीमराव अम्बेडकर थे। उनका काम 300 सदस्यीय संविधान सभा की चर्चाओं और उप-समितियों की अनुषंसाओं को संकलित कर एक मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार करना था जिसे संविधान सभा के अध्यक्ष के नाते डा0 राजेन्द्र प्रसाद स्वीकृत करते थे। फिर वह ड्राफ्ट संविधान में शामिल होता था। संविधान निर्माण का कुछ श्रेय तो आखिरकार देशरत्न डा0 राजेन्द्र प्रसाद को भी मिलना ही चाहिए।

पहले बने DSP, 2 बार क्लियर किया UPSC एग्जाम, अब मिली डेड बॉडी

Posted by mpsamachar On May - 30 - 2017Comments Off on पहले बने DSP, 2 बार क्लियर किया UPSC एग्जाम, अब मिली डेड बॉडी

ias-ashish-dahiyaदिल्ली के बेरसराय फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट में सोमवार को पूल साइड पार्टी के दौरान एक ट्रेनी आईएएस ऑफिसर की स्वीमिंग पूल में डूबने से मौत हो गई। ट्रेनी आईएएस आशीष दहिया (30) सोनीपत के खरखौदा का रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि हादसा लेडी कलीग को डूबने से बचाने के दौरान हुआ।
– सोनीपत के मटिंडू गांव के रहने वाले आशीष दहिया का जन्म 15 जनवरी 1986 को हुआ था।

– उनके पिता कृषि विभाग से बतौर खंड कृषि अधिकारी रिटायर्ड हैं, जबकि मां गवर्नमेंट टीचर रिटायर्ड हैं। वहीं पत्नी भी आईएएस की तैयारी कर रही हैं।
– ट्रेनी आईएएस से पहले आशीष ने वर्ष 2012 में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा में 8वां रैंक प्राप्त किया था और बतौर डीएसपी सिरमौर में पद संभाला था।

इसके बाद सिविल सर्विसेज में 411वां रैंक हासिल की और भारतीय रेवेन्यू सर्विसेज के तहत फरीदाबाद में बतौर आबकारी आयुक्त के रूप में नियुक्ति मिली।
– आशीष ने यहीं हार नहीं मानी और फिर से यूपीएससी क्लियर किया और अपने रैंक में सुधार करते हुए 53वां रैंक हासिल किया।
– इसके बाद से वे बतौर ट्रेनी आईएएस ट्रेनिंग ले रहे थे। इसी दौरान उनकी मौत हो गई।
भारत पेट्रोलियम में भी कर चुके थे जॉब

– आशीष दहिया ने पहली से दसवीं तक की शिक्षा सोनीपत के लिटिल एंजेल स्कूल से प्राप्त की। 2003 में सोनीपत के हिंदू विद्यापीठ बारहवीं की।
– वर्ष 2008 में एनआईटी कुरुक्षेत्र से 4 वर्ष में मेकेनिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा किया और भारत पेट्रोलियम नोएडा में दो वर्ष तक मैनेजर के पद पर नौकरी की।
– इसके बाद सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की।
यूं हुआ हादसा

पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, बेर सराय स्थित फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट में सोमवार को पूल साइड पार्टी हो रही थी। यह प्रोग्राम ट्रेनी आईएएस, आईएफएस और आईआरएस के अफसरों ने बनाया था।

– ट्रेनी अफसरों ने पुलिस को बताया कि पार्टी के दौरान तैरने का प्रोग्राम रखा गया, तभी एक महिला अफसर डूबने लगीं। उन्हें बचाने के लिए आईएएस आशीष दहिया समेत कुछ अफसर पहुंचे। महिला अफसर को बचा लिया गया, लेकिन आशीष पूल में किसी को नहीं दिखे। कुछ देर बाद उनकी बॉडी पानी में दिखी दिखी।
– आशीष को उनके फ्रेंड्स फोर्टिस हॉस्पिटल ले गए, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस को शक है कि पार्टी के दौरान ऑफिसर्स ने शराब पी थी। नशे की हालत में यह हादसा हुआ है।

पिटाई से मरते रहे लोग, जलते रहे वाहन; बेबस रही पुलिस

Posted by mp samachar On May - 19 - 2017Comments Off on पिटाई से मरते रहे लोग, जलते रहे वाहन; बेबस रही पुलिस

logराजनगर थाना क्षेत्र के दो गांवों में भीड़ की पिटाई से बारी-बारी से लोग मौत के मुंह में समाते रहे। भीड़ की बोर से पत्थरबाजी और वाहनों को आग लगाने की घटनाओं को अंजाम दिया जाता रहा। दूसरी ओर, पुलिस बेबस रही। शोभापुर गांव में बच्चा चोर छिपे होने की चर्चा फैली।

गुरुवार भोर तीन बजे के करीब हलदीपोखर की ओर से एक जायलो व इंडिका गाड़ी गोविंदपुर के रास्ते डांडू गांव होते हुए शोभापुर की ओर आ रही थी। कुछ लोगों ने डांडू गांव में गाड़ी रोकने की कोशिश की तो चालक ने रोकने के बजाए रफ्तार तेज कर दी। इससे लोगों को गड़बड़ी की आशंका हुई। गाड़ी का पीछा शुरू किया गया। जायलो गाड़ी भागने में सफल रही लेकिन इंडिका शोभापुर के मुर्तजा अंसारी के घर के बाहर खड़ी दिख गई। तब तक इलाके में बच्चा चोरों के आने की अफवाह फैल चुकी थी।

सुबह चार बजे पूरे क्षेत्र में जंगल की आग की तरह यह बात फैल गई। देखते ही देखते सैकड़ों लोग जुट गए। कमलपुर, गोपीनाथपुर, डांडू एवं आस-पास के लोग मुर्तजा के घर पहुंचे और बाहर से आए लोगों को लोगों को बाहर निकालने को कहा। जब मुर्ताजा ने कहा कि अंदर कोई नहीं है तब ग्रामीण भड़क उठे और जबरन अंदर घुसने की कोशिश की। तब तक थाना प्रभारी टीपी कुशवाहा दल बल के साथ शोभापुर पहुंचे।

ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया परंतु लोग नहीं समझ रहे थे। थाना प्रभारी ने लोगों से दस मिनट का समय मांगा तब तक उत्तेजित लोगों ने थाना प्रभारी पर पथराव किया। साथ ही साथ इंडिका व थाना की गाड़ी को लोगों ने पेट्रोल छिड़क कर जला डला।

पुलिस बल कम संख्या में थी। इस कारण पुलिस मामले की गंभारता को देखते हुए पीछे हटी और मामले को शांत करने की कोशिश की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर अनुमंडलाधिकारी संदीप कुमार दुबे, एसडीपीओ दीपक कुमार पूरी जिला पुलिस टीम के साथ पहुंचे। फिर भी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा था। आस-पास गांव के हजारों लोग शोभापुर गांव में तांडव मचाते रहे। बच्चा चोरों को खोजने के लिए एक समुदाय के घरों में घुसकर तोड़फोड़ की जाने लगी। सामानों को इधर-उधर फेंका जाने लगा। गांव के एक छोर पर खड़ी पुलिस स्थिति से निपटने की रणनीति बना ही रही थी कि करीब दिन के 11 बजे एक युवक को लोगों ने बोरे से ढके शौचालय से खोजकर निकाला और उस पर टूट पड़े।

युवक पर लाठी-डंडे बरसता देख पुलिस ने युवक को बचाने के लिए दौड़ लगाई। पुलिस को आता देख ग्रामीण भाग गये। पुलिस ने मौके से दौड़ाकर कुछ लोगों को गिरफ्तार किया। अस्पताल पहुंचाने के क्रम में रास्ते में ही गंभीर रूप से घायल युवक की मौत हो गयी। इसके बाद शोभापुर में मामला शांत हुआ। फिर एक डेढ़-घंटे बाद शोभापुर से उत्तर-पूर्व की ओर लगभग तीन किमी दूर सोसोमली गांव के खेत में अन्य दो लोगों को भी ग्रामीणों ने पीट-पीट कर मार डाला। पुलिस ने दोनों शवों को बरामद किया। इसके बाद डांडू डुंगरी में एक और लाश पुलिस ने बरामद की।

हाल की घटनाओं से पुलिस ने नहीं सीखा सबक
प्रमोद सिंह, राजनगर। हाल में कोल्हान में विभिन्न स्थानों पर बच्चा चोरी के संदेह में लोगों की पिटाई से हुई मौतों से राजनगर पुलिस ने सबक नहीं सीख। इस संवेदनशील मामले में पुलिस पहले से सतर्कता बरतती तो तीन लोगों के भीड़ का शिकार होकर मारे जाने की घटना को रोका जा सकता था। सरायकेला जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत शोभापुर व सोसोमली में बच्चा चोर संदेह को लेकर भीड़ हिंसक होती गई।

मौके की नजाकत को भांपने के बजाए पुलिस घटना स्थल के समीप खड़ी होकर स्थिति से निपटने के लिए रणनीति बनाने में लगी रही। दूसरी ओर, उग्र ग्रामीणों का तांडव जारी रहा। नतीजन तीन लोगों का ग्रामीणों ने बच्चा चोर समझ कर हत्या कर डाली। सूत्रों की मानें तो बच्चा चोर के इलाके में सक्रिय होने की अफवाह कई दिनों से इलाके में फैली हुई थी। मामले को लेकर कई दिनों से ग्रामीण गोलबंद हो रहे थे। घटना के दिन जब ग्रामीण की जुटान होने लगी तो इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को देर से मिली।

यह पुलिस के खुफिया तंत्र की कमजोरी मानी जा रही है। जब पुलिस घटनास्थल पहुंची तबतक बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गये थे व उग्र हो गये थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ग्रामीण संदिग्ध लोगों को गांव के घरों में घुसकर खोजने लगे। इससे माहौल और ज्यादा बिगड़ने लगा परंतु पुलिस हालात से निपटने की रणनीति ही बनाती रही। ग्रामीणों ने एक व्यक्ति मो. नईम को पीट कर अधमरा कर दिया। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। घटना स्थल पर थाना प्रभारी काफी कम संख्या में पुलिस बल ले कर पहुंचे थे जो उग्र ग्रामीणों को नियंत्रित करने के हिसाब से नाकाफी थे।

फिजां में फैल रहे अफवाहों के बाजार को लेकर पुलिस पहले से संवेदनशील रहती और खुफिया तंत्र को सक्रिय रखती तो घटनाओं को टाला जाना संभव हो सकता था।

रामदेव ने कहा- ‘राष्ट्र ऋषि’, मोदी बोले- आपने जिम्मेदारियां बढ़ा दीं

Posted by mpsamachar On May - 3 - 2017Comments Off on रामदेव ने कहा- ‘राष्ट्र ऋषि’, मोदी बोले- आपने जिम्मेदारियां बढ़ा दीं

baba ramdev and narendra modi_2बाबा केदारनाथ के दर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंतजलि के आयुर्वेदिक रिसर्च इंस्टीट्यूट का उद्घाटन करने हरिद्वार पहुंचे हैं. यहां पहुंचने पर योगगुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया. इस दौरान बाबा रामदेव ने जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राष्ट्र ऋषि’ के रूप में सम्मानित किया, तो वहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस तरह का सम्मान देकर उनकी जिम्मेदारियां बढ़ा दी गई हैं.

इससे पहले प्रधानमंत्री ने योगगुरु रामदेव के आयुर्वेदिक रिसर्च इंस्टीट्यूट का उद्घाटन करने के बाद पूरे संस्थान का खुद जायजा लिया और उसकी खासियतों को जाना. वहीं हरिद्वार में पीएम मोदी का अभिवादन करते हुए योगगुरु रामदेव ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश का गौरव बढ़ाया है. उन्होंने यहां कहा कि मोदी देश को वरदान के रूप में मिले हैं. उनका राष्ट्र ऋषि के रूप में सम्मान होना चाहिए. वह राष्ट्र ऋषि के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे. बाबा रामदेव ने साथ ही कहा कि देश में अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा, पिछड़ा-दलित, यहां की 125 करोड़ आबादी मोदी जी अपना स्वरूप देखता है.

बाबा रामदेव ने इसके साथ ही कहा, पीएम ने भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलाया. मोदी में विश्व का नेतृत्व करने का सामर्थ्य है. जो भी मोदी जी कर रहे हैं उसमें एक आहूति मेरी भी होगी.योगगुरु रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने पीएम मोदी का सम्मान करते हुए उन्हें उनकी एक तस्वीर भेंट की.

योगी आदित्यनाथ से प्रेरित हुई आप? दिल्ली में महापुरुषों के नाम पर मिलने वाली छुट्टियां रद्द करेगी अरविंद केजरीवल सरकार

Posted by mpsamachar On April - 29 - 2017Comments Off on योगी आदित्यनाथ से प्रेरित हुई आप? दिल्ली में महापुरुषों के नाम पर मिलने वाली छुट्टियां रद्द करेगी अरविंद केजरीवल सरकार

yogiयूपी सरकार के बाद अब दिल्ली सरकार ने बड़ी हस्तियों के जन्मदिन या पुण्यतिथि पर दिए जाने वाले सार्वजनिक अवकाश रद्द करने का फैसला किया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया कि दिल्ली सरकार प्रतिष्ठित हस्तियों के जन्मदिन या पुण्यतिथि पर दी जाने वाली छुट्टियां रद्द करेगी। मैंने इस संबंध में मुख्य सचिव को निर्देश दे दिये हैं। अरविंद केजरीवाल सरकार योगी आदित्यनाथ सरकार से प्रेरित लग रही है। मनीष सिसोदिया ने योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी पहल अच्छी है। दिल्ली सरकार दूसरे राज्यों से सीखने के लिए हमेशा तैयार है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के लालबत्ती कल्चर को हटाने और मोहल्ला क्लीनिक को देश भर में अपनाया जा रहा है। हमें भी दूसरों के अच्छे फैसलों को अपनाना चाहिए। अभी दिल्ली में गुरु गोविंद सिंह जयंती, गुरु रविदास जयंती, शिवाजी जयंती, महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती, महावीर जयंती, हजरत अली जन्मदिन, अंबेडकर जयंती, महात्मा गांधी जयंती, महर्षि वाल्मिकी जयंती, गुरु नानक जयंती पर छुट्टी रहती है।
गौरतलब है कि दिल्ली के स्कूलों में भी कई महापुरुषों की जयंतियों पर छुट्टी रहती है। मनीष सिसोदिया ने उत्तर प्रदेश में विभिन्न बड़ी हस्तियों के जन्मदिन या पुण्यतिथि पर दिए जाने वाले 15 सार्वजनिक अवकाश रद्द करने संबंधी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले का स्वागत किया। उत्तर प्रदेश सरकार ने महापुरुषों के जन्मदिन या पुण्यतिथि पर दी जाने वाली 15 सार्वजनिक छुट्टियां रद्द कर दी हैं। जिन अवकाशों को योगी सरकार ने रद्द किया है, उनमें जन नायक कर्पूरी ठाकुर जयंती (24 जनवरी), ख्वाजा मोइनुददीन चिश्ती अजमेरी गरीब नवाज उर्स (14 अप्रैल), चंद्रशेखर का जन्मदिन (17 अप्रैल), परशुराम जयंती (28 अप्रैल), महाराणा प्रताप जयंती (9 मई), छठ पूजा (26 अक्टूबर) आदि शामिल हैं।

सावधान! डिलीट करने के बाद भी फोन ट्रैक करता है ये एप

Posted by mp samachar On April - 27 - 2017Comments Off on सावधान! डिलीट करने के बाद भी फोन ट्रैक करता है ये एप

phpThumb_generated_thumbnail (3)नई दिल्ली। यदि आप भी कैब सर्विस प्रवाइडर ऊबर एप यूज करते हैं तो जरा सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि डिलीट करने के बाद भी यह एप यूजर्स की लोकेशन ट्रैक करता। इसका खुलासा होने के बाद ऊबर एप को गूगल प्ले स्टोर से हटाने की धमकी दी गई है। खबर है कि एपल के सीईओ टिम कुक ने ऊबर के सीईओ को एक मीटिंग में इसको हटाने के लिए कहा है।
इन फोन्स को करता है ट्रैक
बताया गया है कि ऊबर एप डिलीट करने के बावजूद यह आईफोन्स को ट्रैक करता था। हालांकि कि ऊबर का कहना है कि वो ऐसा फ्रॉड से बचने के लिए ऐसा करती थी। लेकिन यह एपल के सुरक्षा नियमों के विरुद्ध है क्योंकि ट्रैक किए जा रहे यूजर्स को इसके बारे में पता नहीं था।
एपल ने लगाई फटकार
इस बारे में जब एपल के सीईओ टिम कुक को इस पूरे मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने ऊबर के सीईओ को बुलाकर फटकार लगाई। ऊबर फिंगरप्रिंटिंग का यूज कर डिवाइस को ट्रैक करता है और इन फिंगरप्रिंटिंग से ड्राइवर्स द्वारा काफी धोखाधड़ी की जा रही थी।
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ऊबर ने यह कहा
इस मामले में ऊबर की ओर से कहा गया है कि वो हम एप डिलीट करने के बाद किसी यूजर की लोकेशन ट्रैक नहीं करते। हालांकि फ्रॉड से बचने और चोरी हुए फोन में ऊबर एप इंस्टॉल करने से बचने के लिए ऐसा किया जाता है। ठीक ऐसी ही तकनीक का यूज संदेहास्पद यूजर्स के अकाउंट को डिटेक्ट करने और ब्लॉक करके यूजर्स के अकाउंट बचाने के लिए भी किया जाता है।

चीन ने किया अमेरिका का स्वागत, कहा- उत्तर कोरिया पर वार्ता को तैयार –

Posted by mp samachar On April - 27 - 2017Comments Off on चीन ने किया अमेरिका का स्वागत, कहा- उत्तर कोरिया पर वार्ता को तैयार –

northkorea650चीन ने गुरुवार को उत्तरी कोरिया के परमाणु और मिसाइल संकट पर अमेरिका के नरम रूख का स्वागत किया, लेकिन दक्षिण कोरिया में तैनात एक अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर आपत्ति जताई। चीन ‘कोरियाई परमाणु मुद्दे’ को हल करने के लिए लंबे समय से बातचीत का दवाब बना रहा है, क्योंकि उत्तर कोरिया बार-बार संयुक्त राज्य को नष्ट करने की धमकी दे रहा है।
ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि उत्तर कोरिया की उकसावे वाली कार्यवाही से निपटने के लिए ‘सभी विकल्प’ खुले हुए है। ट्रंप प्रशासन ने बुधवार को कहा था कि उसका उद्देश्य उत्तरी कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को रोकना है जो कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन कर रहे हैं।
अमेरिकी टिप्पणी का जवाब देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका को कोरियाई प्रायद्वीप में स्थिरता और शांतिपूर्ण परमाणुकरण की तलाश है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारे सामने बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं। हालांकि, हम स्वयं और अपने सहयोगियों का बचाव करने के लिए तैयार रहते हैं।’ चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमने हाल में ही देखा है कि कई अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि वे कोरियाई परमाणु मुद्दे का बातचीत और विचार विमर्श के साथ शांतिपूर्वक समाधान चाहते हैं। हमें लगता है कि यह एक सकारात्मक संकेत है।
दरअसल उत्‍तर कोरिया से युद्ध की आशंकआओं के बीच अमेरिका का मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम ‘थाड’ दक्षिण कोरिया पहुंच चुका है। दक्षिण कोरिया के अधिकारियों का कहना है कि इस सिस्‍टम की तैनाती के लिए पिछले वर्ष ही दोनों देशों में रजामंदी हुई थी। हालांकि इस सिस्‍टम की तैनाती से युद्ध के आसार और बढ़ गए हैं। अमेरिका का कहना है कि उत्‍तर कोरिया द्वारा थोपी गई किसी भी विपरीत स्थिति के लिए इसको यहां पर तैनात किया जा रहा है।

top इंदौर उज्जैन खण्डवा गुना ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ग्वालियर चर्चा दुष्कृत्य निधन पन्ना पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी प्रदेश बधाई बाबा रामदेव बैठक भेंट भोपाल मंत्रालय मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी मध्यप्रदेश मनरेगा मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री निवास मुख्यमंत्री श्री चौहान मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मुलाकात युवा राज्यपाल राज्यपाल श्री राम नरेश यादव राज्य शासन राज्य सरकार रोजगार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग लोकार्पण विकास विमोचन शुभारंभ श्री शिवराजसिंह चौहान श्री शिवराज सिंह चौहान सहकारिता सीहोर स्वास्थ्य हत्या