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मध्यप्रदेश को 84 हजार 358 अतिरिक्त इंदिरा आवास आवंटित

Posted by mpsamachar On February - 15 - 2013Comments Off on मध्यप्रदेश को 84 हजार 358 अतिरिक्त इंदिरा आवास आवंटित

Indira-Awaas-Yojanaइंदिरा आवास योजना में मध्यप्रदेश को 84 हजार 358 अतिरिक्त इंदिरा आवास का आवंटन केन्द्र ने किया है। इन आवास के लिये 290 करोड़ 58 लाख की मंजूरी प्रदान करने के साथ ही केन्द्रीय अंश-दान की 50 प्रतिशत राशि के रूप में 145 करोड़ 29 लाख रुपये की राशि पहली किस्त में जारी की गई है। आवंटित इन अतिरिक्त इंदिरा आवास में से वन अधिकार अधिनियम, 2006 के लाभार्थियों के लिये 53 हजार 360 अतिरिक्त मकान और भूमिहीन ग्रामीण परिवारों के लिये वासभूमि प्रोत्साहन योजना के 30 हजार 998 अतिरिक्त मकान की मंजूरी मिली है। अतिरिक्त इंदिरा आवास की मंजूरी मिलने से चालू माली साल में मध्यप्रदेश का आवंटन मूल लक्ष्य का दोगुना हो गया है। इस तरह अब तक मध्यप्रदेश को एक लाख 68 हजार 716 इंदिरा आवास आवंटित हो चुके हैं।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने बताया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में इंदिरा आवास योजना में 84 हजार 358 मकान का सामान्य आवंटन प्राप्त हुआ था। इस उद्देश्य से 144 करोड़ 42 लाख रुपये की राशि चालू माली साल की शुरूआत में केन्द्र ने जारी की थी। चूँकि मध्यप्रदेश को देश के कई राज्य की तुलना में बहुत कम इंदिरा आवास आवंटित हो रहे हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले 5 वर्ष में प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह तथा केन्द्रीय मंत्रीगण से बार-बार यह अनुरोध किया था कि प्रदेश की आबादी के मान से पर्याप्त संख्या में इंदिरा आवास आवंटित किये जायें। गरीब ग्रामीणों के साथ हो रहे इस अन्याय को दूर करने के मक़सद से गत दिसम्बर माह में विधानसभा सत्र के दौरान सदन में सर्व-सम्मति से शासकीय संकल्प पारित कर केन्द्र से अतिरिक्त इंदिरा आवास आवंटित करने की माँग की गई थी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001-02 तथा 2002-03 में सर्वे में हुई त्रुटियों की वजह से प्रदेश के आवासहीन गरीब ग्रामीण इस अन्याय का शिकार हुए थे। सर्वेक्षण में कच्चे ग्रामीण घरों में लगे कबेलू को टाइल्स की श्रेणी में मान लिया गया था। इस वजह से कच्चे घर पक्के घरों की श्रेणी में दर्ज हो गये। आज भी प्रदेश के एक करोड़ 11 लाख गरीब ग्रामीण में से करीब 73 लाख ऐसे परिवार हैं, जिनके पास पक्के मकान नहीं हैं। इस त्रुटिपूर्ण सर्वे की वजह से बिहार, आसाम, उत्तरप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र राज्य की तुलना में मध्यप्रदेश को बहुत कम संख्या में इंदिरा आवास का आवंटन हो रहा था। मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी मध्यप्रदेश को मात्र 84 हजार 358 इंदिरा आवास केन्द्र से आवंटित हुए थे।

इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य के गरीब ग्रामीणों के आवास की जरूरतों को पूरा करने के लिये प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की शुरूआत कर ऐसे ग्रामीण हितग्राहियों को 70 हजार रुपये लागत के मकान के लिये ऋण-अनुदान योजना शुरू की। इस योजना में अब तक एक लाख से अधिक आवास को मंजूरी मिल चुकी है।

मध्यप्रदेश में जॉब फेयर्स के जरिये 1 लाख 22 हजार युवाओं का प्लेसमेंट

Posted by mpsamachar On February - 15 - 2013Comments Off on मध्यप्रदेश में जॉब फेयर्स के जरिये 1 लाख 22 हजार युवाओं का प्लेसमेंट

placementशिक्षित युवाओं को निजी और शासकीय क्षेत्र में रोजगार दिलवाने के लिये मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई जॉब फेयर योजना में अभी तक 1 लाख 22 हजार से अधिक युवा को प्लेसमेंट मिला है। अभी तक 797 जॉब फेयर्स में 1 लाख 10 हजार से अधिक युवा को निजी क्षेत्र में, 3,872 को वायु सेना तथा 2,224 को थल सेना में रोजगार मिला है। इसके अलावा 7,120 केरियर काउंसलिंग शिविर के माध्यम से 1 लाख 33 हजार से अधिक युवा को स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद केरियर के बारे में विशेषज्ञों द्वारा परामर्श दिया गया है।

शिक्षित युवाओं को विभिन्न क्षेत्र में रोजगार दिलवाने के उद्देश्य से उद्योग विभाग के रोजगार प्रभाग द्वारा वर्ष 2008-09 से जॉब फेयर एवं केरियर काउंसलिंग योजना शुरू की गई है। इसमें रोजगार कार्यालयों के माध्यम से निजी और सार्वजनिक संस्थानों में रिक्त पदों की भर्ती के लिये जॉब फेयर लगाया जाता है। प्रदेश और प्रदेश के बाहर औद्योगिक संस्थानों में उनके यहाँ आवश्यक जनशक्ति भर्ती के लिये जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति जॉब फेयर लगाती है। इसके लिये जिला प्रशासन द्वारा प्रशासकीय और वित्तीय मदद दी जाती है।

वायु सेना, थल सेना और जल सेना में सैनिक, तकनीकी और लिपिकीय पदों पर मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिये क्षेत्रीय भर्ती सेन्टर द्वारा प्रस्ताव भेजा जाता है। जिला रोजगार कार्यालय के माध्यम से इसके लिय आवश्यक सहयोग दिया जाता है। प्रत्येक जिले में वर्ष 2012-13 में कम से कम दो जॉब फेयर का लक्ष्य रखा गया है। भोपाल, जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, देवास और धार जैसे बड़े जिलों में वर्ष में 4 जॉब फेयर का लक्ष्य दिया गया है।

जॉब फेयर योजना के पहले वर्ष 2008-09 में कुल 10 हजार 562 युवाओ को प्लेसमेंट मिला। इनमें से 9,652 की निजी क्षेत्र में और 910 की भारतीय वायु सेना में भर्ती हुई। दूसरे वर्ष 2009-10 में 9,881 युवा को जॉब मिला। इनमें से 8,651 की निजी क्षेत्र में तथा 1,230 की वायु सेना में भर्ती हुई। वर्ष 2010-11 में 22 हजार 201 युवा को जॉब मिला। इनमें से 20 हजार 710 को निजी क्षेत्र में, 800 को भारतीय वायु सेना में तथा 691 को थल सेना में रोजगार मिला। वर्ष 2011-12 में 35 हजार 12 युवा को प्लेसमेंट मिला। इनमें 29 हजार 967 को निजी क्षेत्र में, 428 वायु सेना में तथा 4,617 को थल सेना में प्लेसमेंट मिला। वर्ष 2012-13 में जनवरी के अंत तक 44 हजार 479 से युवा को प्लेसमेंट मिला। इनमें से 41 हजार 59 को निजी क्षेत्र में, 504 को वायु सेना में तथा 2,916 को थल सेना में काम मिला।

केरियर काउंसलिंग

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थियों को केरियर के बारे में परामर्श देने कार्य भी किया जा रहा है। अभी तक 7,120 शिविर में 1 लाख 35 हजार से अधिक विद्यार्थी को परामर्श दिया गया।

राष्ट्रपति ने मध्यप्रदेश को निःशक्तजन सशक्तिकरण राष्ट्रीय पुरस्कार से किया सम्मानित

Posted by mpsamachar On February - 7 - 2013Comments Off on राष्ट्रपति ने मध्यप्रदेश को निःशक्तजन सशक्तिकरण राष्ट्रीय पुरस्कार से किया सम्मानित

awardराष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय विभाग को वर्ष 2012 के निःशक्तजन सशक्तिकरण राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। मध्यप्रदेश को यह पुरस्कार सर्वोत्तम नियोक्ता श्रेणी में दिया गया है। मध्यप्रदेश की तरफ से सचिव सामाजिक न्याय श्री वी.के. बाथम ने राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी से नई दिल्ली में पुरस्कार ग्रहण किया।

केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वर्ष 2012 के लिए विभिन्न श्रेणियों में 48 पुरस्कार दिये गये। कार्यक्रम में केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कुमारी शैलजा और राज्य मंत्री श्री डी. नेपोलियन मौजूद थे।

मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय विभाग ने निःशक्तजन को रोजगार देने में प्रभावी कार्य किया है। विभाग में कुल 1565 कर्मचारी में से 58 निःशक्तजन हैं। निःशक्तजन में अस्थि, दृष्टि बाधित, श्रवण बाधित और शारीरिक रूप से निःशक्त शामिल हैं। वे प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने सीधी भर्ती की प्रक्रिया में निःशक्तजन के लिए 6 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है। इन कर्मचारियों को उनकी उत्पादकता और कौशल बढ़ाने के लिए न केवल सहायक यंत्र दिये गये हैं, बल्कि उन्हें सर्वाधिक रूप से अपेक्षित प्रशिक्षण भी दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि निःशक्त कर्मचारियों को प्रशंसा, पदोन्नति और अन्य भत्तों में समानता दी जाती है। उन्हें आवास आवंटन में आरक्षण का लाभ भी दिया जाता है और व्यावसायिक कर में छूट दी जाती है।

मध्यप्रदेश में वोकेशनल यूनिवर्सिटी स्थापित करेगा सिम्बाईसिस

Posted by mpsamachar On February - 6 - 2013Comments Off on मध्यप्रदेश में वोकेशनल यूनिवर्सिटी स्थापित करेगा सिम्बाईसिस

cm_meetमध्यप्रदेश में सिम्बाईसिस वोकेशनल यूनिवर्सिटी स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान से भेंट के दौरान आज यहाँ सिम्बाईसिस ओपन यूनिवर्सिटी की डायरेक्टर सुश्री स्वाति मजूमदार ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में वोकेशनल यूनिवर्सिटी स्थापित करने में राज्य सरकार मदद करेगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यूनिवर्सिटी के लिये सिम्बाइसिस स्थान चयन करें। मध्यप्रदेश में स्क्ल्डि मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। युवाओं को रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। इसके लिये मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना लागू की जा रही है।

चर्चा के दौरान सुश्री मजूमदार ने बताया कि सिम्बाईसिस स्किल डव्हलपमेंट पर केन्द्रित वोकेशनल यूनिवर्सिटी बनाना चाहता है। स्किल डेव्हलपमेंट वर्तमान समय की जरूरत है। सिम्बाइसिस के पूरे देश में 17 केम्पस स्थापित हैं। इस दौरान अपर मुख्य सचिव श्री पी.के.दाश, अपर मुख्य सचिव श्रीमती अजिता वाजपेयी पांडे, सचिव राजस्व श्री अजीत केशरी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री एस.के.मिश्रा भी उपस्थित थे।

मध्यप्रदेश में महिला उत्पीड़न एवं दुष्कृत्य संबंधी चिन्हित अपराधों में त्वरित कार्यवाही

Posted by mpsamachar On February - 6 - 2013Comments Off on मध्यप्रदेश में महिला उत्पीड़न एवं दुष्कृत्य संबंधी चिन्हित अपराधों में त्वरित कार्यवाही

courtमहिला उत्पीड़न एवं बलात्कार संबंधी चिन्हित अपराधों में प्रदेश में त्वरित कार्यवाही की जा रही है। समय-सीमा में प्रकरणों की विवेचना कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। न्यायालय में भी त्वरित निर्णय हो रहे हैं और न्यायाधीशों द्वारा अपराधियों को कठोर सजा सुनाई जा रही है।

वर्ष 2012 में कुल 226 जघन्य एवं सनसनीखेज गंभीर प्रकृति के प्रकरण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 75 प्रकरण महिलाओं के साथ घटी आपराधिक घटनाओं से संबंधित है। इन प्रकरणों में विवेचना एवं अभियोजन स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मॉनीटरिंग की जा रही है। परिणामस्वरूप इस प्रकार के प्रकरणों में 61 प्रतिशत की सजा की दर वर्ष 2012 में रही है।

धार में आरोपी को 35 दिवस में सजा

धार जिले के मनावर थाना के ग्राम तलाईपुरा करोली में नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कृत्य और गला दबाकर हत्या करने के मामले में आरोपी सुनील बलाई को मृत्युदण्ड से दण्डित किया गया। थाने में 31 अक्टूबर को प्रकरण पंजीबद्ध किया गया और 9 दिन में अनुसंधान पूर्ण कर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा 5 दिसम्बर को आरोपी को मृत्यु दण्ड से दण्डित किया गया। इस तरह से मात्र 35 दिन में संपूर्ण कार्यवाही पूर्ण हुई।

सतना जिले में आरोपी को 30 दिवस में सजा

सतना जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र में 8 अप्रैल को नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कृत्य के अपराधी राकेश बर्मन को 24 घंटे में गिरफ्तार किया गया। पुलिस द्वारा 21 दिवस में अनुसंधान पूर्ण कर 2 मई को चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा मात्र 7 दिन में निर्णय पारित कर आरोपी को 10 वर्ष की कठोर सजा तथा 10 हजार रुपये के जुर्माने से दण्डित किया गया। इस प्रकार घटना से निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया 30 दिन में पूरी की गई।

इसी तरह वर्ष 2012 में ही देवास में कैलाश बलाई द्वारा एक महिला भंवरबाई की हत्या एवं पैर काटकर चाँदी की कड़ी लूटने के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। जिला डिण्डोरी के थाना शाहपुर में आरोपी संतोष एवं राजकुमार द्वारा एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कृत्य की चेष्टा के प्रकरण में आरोपी को 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा से दण्डित किया गया। जिला इंदौर के थाना कसरावद क्षेत्र के आरोपी राजेन्द्र द्वारा नाबालिग के साथ दुष्कृत्य किया गया और फिर उसे जलाकर हत्या का प्रयास किया गया। पीड़िता की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। प्रकरण में न्यायालय द्वारा आरोपी को आजीवन कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

इसी प्रकार जिला सीहोर के थाना सिद्दीकगंज में श्री भोपाल सिंह द्वारा अपनी पत्नी शुगनबाई की हत्या के प्रकरण में न्यायालय द्वारा आरोपी को आजीवन कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। जिला ग्वालियर के थाना विश्वविद्यालय के आरोपी निरंजन गुर्जर, राकेश कुशवाह एवं विशम्भर सिंह गुर्जर द्वारा पीड़िता के साथ दुष्कृत्य करने के प्रकरण में सभी आरोपियों को 14-14 वर्ष के सश्रम कारावास से दण्डित किया गया। पीड़िता को जबरदस्ती बोलेरो में बैठाकर दुष्कृत्य किया गया था। जिला खण्डवा के थाना नर्मदा नगर के आरोपी जितेन्द्र द्वारा डेढ़ वर्षीय बालिका के साथ दुष्कृत्य करने के प्रकरण में आरोपी को 14 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

मध्यप्रदेश वर्ष 2014 तक पावर सरप्लस राज्य होगा

Posted by mpsamachar On February - 6 - 2013Comments Off on मध्यप्रदेश वर्ष 2014 तक पावर सरप्लस राज्य होगा

Rajendrashuklaऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश वर्ष 2014 मंे ऊर्जा के क्षेत्र में स्वावलम्बी बनने के साथ अन्य राज्यों को बिजली देने की स्थिति में आ जायेगा बशर्ते केन्द्र राज्य सरकार द्वारा ऊर्जा के क्षेत्र में समय-समय पर उठाये गये मुद्दों का शीघ्र समय रहते निराकरण करे। श्री राजेन्द्र शुक्ल आज नई दिल्ली में राज्यों/संघ क्षेत्रों के ऊर्जा मंत्रियों के 6वें सम्मेलन में बोल रहे थे। सम्मेलन की अध्यक्षता केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों और ऊर्जा सचिवों ने भाग लिया।

श्री शुक्ल ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में विद्युत की माँग और उपलब्धता में लगभग 10 प्रतिशत का अंतर है। उन्होंने कहा कि विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए उठाये गये अभिनव प्रयासों से वर्ष 2014 तक मध्यप्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में पावर सरप्लस हो जायेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह सब केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश की विभिन्न ताप विद्युत परियोजनाओं के लिए कोल लिंकेज/कोल ब्लॉक्स की उपलब्धता पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि 2 x 660 मेगावाट क्षमता की श्रीसिंगाजी ताप विद्युत परियोजना और 2 x 800 मेगावाट क्षमता की बाणसागर ताप विद्युत परियोजना के लिए कोल लिंकेज प्राप्त नहीं होने से दोनों परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन शुरू नहीं हो पा रहा है। श्री शुक्ल ने आग्रह किया कि प्राथमिकता के आधार पर दोनों परियोजनाओं के लिए कोल लिंकेज प्रदान किया जाय। उन्होंने मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए राज्य के विद्युतघरों के लिए दोनों पोर्ट यानी पश्चिमी एवं पूर्वी पोर्ट से कोयला आयात की अनुमति और पर्यावरण स्वीकृति शीघ्र दिये जाने का भी अनुरोध किया।

श्री शुक्ल ने बताया कि विद्युत वितरण कम्पनियों की वित्तीय साध्यता के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय पुनर्संरचना योजना शुरू की है। योजना में लगभग 2900 करोड़ की ट्रांजिशनल सहायता राज्य शासन द्वारा विद्युत कम्पनियों को प्रदान की गयी है। श्री शुक्ल ने राज्य शासन द्वारा वितरण कम्पनियों को दी गयी सहायता के 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति अनुदान के रूप में देने की माँग की। उन्होंने आगे बताया कि नेशनल इलेक्ट्रिसिटी फण्ड के उद्देश्यों के अनुरूप प्रदेश में फीडर विभक्तिकरण योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के लिए ग्रामीण विद्युतीकरण निगम से ऋण लिया गया है। उन्होंने अनुरोध किया कि ब्याज अनुदान का लाभ प्रदेश की फीडर विभक्तिकरण योजना के अंतर्गत ग्रामीण विद्युतीकरण निगम से प्राप्त ऋण के लिए भी दिया जाय।

श्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के कार्यों में गति लाने के हरसम्भव प्रयास किये जा रहे हैं। श्री शुक्ल ने योजना में 100 से कम जनसंख्या वाले ग्रामों एवं मजरों/टोलों को भी सम्मिलित किये जाने की माँग की। उन्होंने आर-एपीडीआरपी योजना में 10 हजार या इससे अधिक आबादी वाले नगरों को भी शामिल किये जाने की माँग की।

श्री शुक्ला ने बताया कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों को विद्युत कटौती से अलग रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए कृषि तथा घरेलू क्षेत्रों को अलग-अलग फीडरों से विद्युत प्रदाय के लिए फीडर विभक्तिकरण योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। जून 2013 तक सभी चिन्हित 11 के.वी. फीडर के कार्य पूर्ण कर सम्पूर्ण प्रदेश मेंं गैर कृषि उपभोक्ताओं के लिए 24 घंटे विद्युत प्रदाय प्रारम्भ किया जायेगा। उन्होंने हाल ही में भारत सरकार द्वारा वर्ष 2011-12 के लिए प्रदेश को दिये गये कृषि कर्मण अवार्ड का जिक्र करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र को गुणवत्तापूर्ण बेहतर विद्युत प्रदाय के परिणामस्वरूप ही प्रदेश को इस अवार्ड से नवाजा गया।

श्री शुक्ल ने कहा कि गैर परम्परागत ऊर्जा और डिमाण्ड साइड मैनेजमेण्ट को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश में पृथक से नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग गठित किया गया है।

श्री शुक्ल ने सम्मेलन में जानकारी दी कि मध्यप्रदेश में नियामक आयोग द्वारा प्रतिवर्ष टैरिफ आदेश समय पर जारी किया जा रहा है। ईधन लागत भी स्वतः उपभोक्ता पर भारित करने की व्यवस्था की गई है। विद्युत कम्पनियों को टैरिफ सब्सिडी का अग्रिम रूप से पूर्ण भुगतान किया जा रहा है। वितरण कम्पनियों द्वारा एटी एण्ड सी हानियों में कमी लाने के गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्ष में प्रतिवर्ष एटी एंड सी हानियों के स्तर में 3 प्रतिशत की कमी लाने का संकल्प राज्य विधानसभा में पारित किया गया था।

बेटियों को सशक्त बनाने की शुरूआत की है मध्यप्रदेश ने – मुख्यमंत्री श्री चौहान

Posted by mpsamachar On February - 5 - 2013Comments Off on बेटियों को सशक्त बनाने की शुरूआत की है मध्यप्रदेश ने – मुख्यमंत्री श्री चौहान

Shivraj-Singh-Chouhanमुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये बेटियों के जन्म से योजनाएं बनाने की शुरूआत मध्यप्रदेश ने की है। अन्य सरकारें भी अब मध्यप्रदेश की पहल अपना रही है। श्री चौहान ने लाड़ली लक्ष्मी योजना, गाँव की बेटी योजना, प्रतिभा किरण योजना और उच्च शिक्षा ऋण गारंटी योजना की चर्चा करते हुये कहा कि महिलाओं को नौकरियों और राजनीतिक क्षेत्र में सहयोग और सुविधाएं देकर उन्हें सशक्त बनाया गया है।

मुख्यमंत्री आज यहां पुराने शहर में शासकीय गीतांजलि कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के अतिरिक्त ब्लाक के निर्माण कार्य का भूमिपूजन करने के बाद छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा गुट्टू भैया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने महाविद्यालय की ओर से मिलने वाली 350 रूपये की निर्धन छात्रवृत्ति को अपर्याप्त बताते हुए स्कालरशिप के लिये पात्र प्रत्येक छात्रा को 5000 रूपये प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने महाविद्यालय छात्राओं के आग्रह पर महाविद्यालय में स्पोर्टस काम्पलेक्स बनाने की घोषणा की। उन्होंने स्वर्गीय गीतांजलि और डा. शंकरदयाल शर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महाविद्यालय के विकास में हरसंभव सहयोग किया जायेगा। महाविद्यालय में शैक्षणिक स्टाफ की कमी दूर की जायेगी।

मुख्यमंत्री के स्वागत के समय दो छात्राओं ने अपनी माताओं के इलाज के लिये आवेदन दिये। मुख्यमंत्री ने तत्काल कलेक्टर श्री निकुंज श्रीवास्तव को इलाज की औपचारिकताएं पूरा करने के निर्देश दिये। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर स्थानीय जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष हैं। श्री रमेश शर्मा ने कहा कि छात्राओं के शैक्षणिक विकास में समाज के हर व्यक्ति का योगदान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बेटियों को आगे बढ़ाने के लिये सबसे ज्यादा योजनाएं बनाई हैं।

मुख्यमंत्री ने छात्राओं से आत्मीय बातचीत की और उन्हें आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने छात्राओं का आव्हान किया कि वे बड़ा सोचें, साहस रखें और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि बेटियों में न तो प्रतिभा की कमी है और न ही साहस और शक्ति की। थोड़ी सी सहायता, नैतिक बल मिलने पर वे असंभव काम भी कर सकती हैंै।

महाविद्यालय की प्राचार्या श्रीमती डाली मल्होत्रा ने स्वागत भाषण दिया और कालेज का प्रगति प्रतिवेदन पढ़ा। उन्होंने बताया कि यह महाविद्यालय भोपाल जिले और संभाग में सर्वाधिक विद्यार्थी संख्या वाला महाविद्यालय है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर निर्धन छात्राओं को छात्रवृत्ति के चेक भेंट किये और उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया। महाविद्यालय की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये गये। चित्रकला विभाग के अध्यक्ष श्री कीर्ति सिंह ने स्मृति चिन्ह के रूप में मुख्यमंत्री का पोट्रेट भेंट किया। सुश्री महविश परवेज ने बेटियों को आने दो कविता पढ़ी। श्रीमती मधुबाला वर्मा ने आभार व्यक्त किया। ए.बी.व्ही.पी. क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री विष्णुदत्ता शर्मा उपस्थित थे। सुश्री दिवा मिश्रा ने कार्यक्रम का संचालन किया।

मध्यप्रदेश का घरेलू उत्पादन आठ वर्ष में 96 प्रतिशत बढ़ा

Posted by mpsamachar On February - 5 - 2013Comments Off on मध्यप्रदेश का घरेलू उत्पादन आठ वर्ष में 96 प्रतिशत बढ़ा

madhya-pradeshमध्यप्रदेश में विकास के लिए किये गये लगातार प्रतिबद्ध प्रयासों के चलते बीते सात वर्ष में विकास के हर क्षेत्र में जबर्दस्त उपलब्धियाँ हासिल हुई हैं। इस अवधि में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 96 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि प्रचलित दरों पर प्रति व्यक्ति आय में लगभग 284 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि कृषि, उद्योग और सेवा, विकास के इन तीनों क्षेत्र में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ा है।

वित्त, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री श्री राघवजी ने बताया कि स्थिर भावों पर मध्यप्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद आधार वर्ष 2004-05 में एक लाख 12 हजार 926 करोड़ 89 लाख रुपये था। मध्यप्रदेश आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अग्रिम अनुमानों के अनुसार वर्ष 2012-13 में यह बढ़कर 2 लाख 21 हजार 462 करोड़ 86 लाख रुपये हो गया है। वर्ष 2011-12 में त्वरित अनुमान के अनुसार यह 2 लाख 1 हजार 898 करोड़ 87 लाख रुपये था।

प्रति व्यक्ति आय                 (प्रचलित दर)
2004-05                             15,442
2005-06                             16,631
2006-07                            19,028
2007-08                            20,935
2008-09                            25,278
2009-10                            28,712
2010-11                             32,223
2011-12                             37,994
2012-13 (अग्रिम)               43,864
स्थिर भावों पर शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद आधार वर्ष 2004-05 में 99 हजार 940 करोड़ एक लाख था, जो वर्ष 2012-13 (अग्रिम) में एक लाख 96 हजार 253 करोड़ 48 लाख रुपये हो गया। यह वृद्धि भी 96.37 प्रतिशत है।

योजना मंत्री ने बताया कि वर्ष 2004-05 से कृषि, उद्योग तथा सेवा, तीनों क्षेत्रों में शानदार सफलता अर्जित की गयी है। मध्यप्रदेश में आलोच्य अवधि में कृषि क्षेत्र और कृषि उत्पादन में बड़ी वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में कुल एक करोड़ 97 लाख 19 हजार 497 हेक्टेयर भूमि कृषि के अंतर्गत थी। यह क्षेत्र वर्ष 2011-12 में बढ़कर 2 करोड़ 21 लाख 65 हजार 760 हो गया। इसी प्रकार, प्रदेश में कृषि उत्पादन वर्ष 2004-05 में 2 करोड़ 49 लाख 39 हजार 689 मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2011-12 में बढ़कर 3 करोड़ 2 लाख मीट्रिक टन हो गया।

कृषि उत्पादन में इस अभूतपूर्व वृद्धि में सिंचाई साधनों में तेजी से विस्तार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2004-05 में जहाँ सिर्फ 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी, वहीं वर्ष 2011-12 में 21 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवायी गयी। गेहूँ, धान, सोयाबीन, चना और सरसों आदि प्रमुख फसलों के उत्पादन और उत्पादकता में विशेष वृद्धि हुई। गेहूँ उत्पादन में मध्यप्रदेश ने कीर्तिमान बनाया है। इस साल इसके पहले नम्बर पर आ जाने की पूरी संभावना है। प्रदेश में वर्ष 2011-12 में 127 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उत्पादन हुआ।

प्रदेश में कृषि विकास दर वर्ष 2004-05 में 7.98 प्रतिशत थी। यह वर्ष 2011-12 में बढ़कर 18.89 प्रतिशत हो गयी, जो देश में सबसे अधिक है। विकास के प्राथमिक क्षेत्र (कृषि, पशुपालन, वानिकी, मछली उत्पादन) में स्थिर मूल्य पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद 31 हजार 238 करोड़ 30 लाख था। यह वर्ष 2012-13 (अग्रिम) में बढ़कर 53 हजार 503 करोड़ 43 लाख रुपये हो गया।

द्वितीयक क्षेत्र में खनिज उत्पादन, उद्योग, विनिर्माण, विद्युत, गैस और जल आपूर्ति आते हैं। इस क्षेत्र में वर्ष 2004-05 में सकल घरेलू उत्पाद 30 हजार 658 करोड़ 8 लाख रुपये था। यह वर्ष 2012-13 (अग्रिम) में बढ़कर 61 हजार 185 करोड़ 30 लाख रुपये हो गया। इसमें खनिज उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। प्रदेश में वर्ष 2004-05 में समस्त खनिज उत्पादन 4 हजार 783 करोड़ 71 लाख रुपये था। यह वर्ष 2011 में बढ़कर 10 हजार 659 करोड़ 43 लाख रुपये हो गया। यह वृद्धि 223 प्रतिशत है।

इसी तरह, तृतीयक क्षेत्र में परिवहन, भण्डारण, संचार, व्यापार, होटल और रेस्टोरेन्ट, बैंकिंग तथा बीमा, रियल स्टेट तथा अन्य सेवाएँ आती हैं। इस क्षेत्र में वर्ष 2004-05 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद 51 हजार 30 करोड़ 51 लाख रुपये था। वर्ष 2012-13 (अग्रिम) में यह बढ़कर एक लाख 6 हजार 114 करोड़ 13 लाख रुपये हो गया। यह वृद्धि दो गुना से अधिक है।

प्रति व्यक्ति आय

मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति आय (प्रचलित दरों पर) में वर्ष 2005-06 की तुलना में वर्ष 2011-12 में 284 प्रतिशत वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में प्रदेश यह आय 15 हजार 442 रुपये थी। अग्रिम अनुमानों के यह वर्ष 2012-13 में बढ़कर 43 हजार 864 रुपये हो गयी।

प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में वर्ष 2005-06 से साल दर साल में 15 हजार 442 रुपये थी, जो वर्ष 2005-06 में बढ़कर 16 हजार 631, वर्ष 2006-07 में 19 हजार 028, वर्ष 2007-08 में 20 हजार 935, वर्ष 2008-09 में 25 हजार 278, वर्ष 2009-10 में 28 हजार 712, वर्ष 2010-11 में 32 हजार 223 तथा वर्ष 2011-12 में 37 हजार 994 रुपये हो गई। वर्ष 2012 के अग्रिम अनुमान के अनुसार यह और बढ़कर 43 हजार 864 रुपये हो जाने की संभावना है।

 

स्पर्श अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवार्ड

Posted by mpsamachar On February - 1 - 2013Comments Off on स्पर्श अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवार्ड

e-gov-awdनिःशक्तजन के कल्याण के लिये प्रदेश में शुरू हुए स्पर्श अभियान को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवार्ड के लिये चुना है। सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संचालित इस अभियान के जरिये प्रदेश में अस्थि-बाधित, दृष्टि-बाधित, श्रवण-बाधित, मंदबुद्धि निःशक्त व्यक्तियों के समग्र पुनर्वास की दिशा में सफल प्रयास हुए हैं।

आयुक्त सामाजिक न्याय श्री व्ही.के. बाथम ने बताया कि यह राष्ट्रीय अवार्ड 11 फरवरी को राजस्थान के जयपुर में आयोजित 16वीं नेशनल कान्फ्रेंस ऑफ ई-गवर्नेंस के अवसर पर दिया जायेगा। दो दिवसीय इस कान्फ्रेंस में विभिन्न नवाचारों के लिये नेशनल ई-गवर्नेंस अवार्ड की विभिन्न श्रेणियों के विजेता पुरस्कृत होंगे।

क्यूबेक में मध्यप्रदेश को व्यापार तथा निवेश संबंधी ऑफिस खोलने का सुझाव

Posted by mpsamachar On January - 31 - 2013Comments Off on क्यूबेक में मध्यप्रदेश को व्यापार तथा निवेश संबंधी ऑफिस खोलने का सुझाव

mr.-francoisकेनेडा के प्रांत क्यूबेक के मिनिस्टर ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन्स एण्ड एक्स्टर्नल ट्रेड श्री जीन फ्रेंकोइस लिसी ने कहा है कि क्यूबेक में मध्यप्रदेश को व्यापार और निवेश संबंधी कार्यों के लिये ऑफिस खोलना चाहिये। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार-उद्योग संबंधी कार्यों में सुविधा होगी। श्री लिसी ने यह बात आज यहाँ वित्त मंत्री श्री राघवजी के साथ सौजन्य भेंट में कही। इस अवसर पर वित्त सचिव श्री एस.एन. मिश्रा, ट्राईफेक के प्रबंध संचालक श्री ए.के. भट्ट और मुम्बई स्थित क्यूबेक के काउंसुल एण्ड डायरेक्टर श्री बेनोइट-जीन बर्नार्ड भी उपस्थित थे।

श्री लिसी ने श्री राघवजी से मध्यप्रदेश की आर्थिक प्रगति, निवेश संभावनाओं, निवेश के लिये अधिक उपयुक्त क्षेत्रों तथा अन्य विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि क्यूबेक मध्यप्रदेश के साथ दीर्घकालिक व्यावसायिक संबंध बनाना चाहता है। हेल्थ सेक्टर में निवेश की संभावनाओं को तलाश किया जा रहा है। उज्जैन जिले को डायबिटीज के अध्ययन के लिये सेम्पल के लिये चुना गया है, जहाँ लगभग २ हजार लोगों का परीक्षण किया जायेगा। उन्होंने मध्यप्रदेश की उद्योग और व्यवसाय हितैषी नीतियों तथा सरकार की सक्रियता की तारीफ की। श्री लिसी ने मध्यप्रदेश में मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट में भी रुचि प्रदर्शित की।

श्री राघवजी ने कहा कि मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। यहाँ कृषि, ऊर्जा, सीमेंट, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, खाद्य प्र-संस्करण, सूचना प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएँ हैं। साथ ही दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर में भी अच्छा निवेश किया जा सकता है। उन्होंने क्यूबेक को इन क्षेत्रों में निवेश का न्यौता देते हुए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा हर-संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र में दी जा रही विशेष सुविधाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में अधोसंरचना का तेजी से विकास किया गया है। इसके फलस्वरूप कभी पिछड़ा कहा जाने वाला मध्यप्रदेश अब तेजी से विकसित होता प्रदेश बन गया है। क्यूबेक के मिनिस्टर ने श्री राघवजी को उनके देश आने का आमंत्रण भी दिया।

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